शारदीय नवरात्र में विसर्जन के 230 दिन बाद भी रमौआ बांध की सूखी जमीन पर जस की तस रखी पीओपी की देवी प्रतिमा को शुक्रवार को अचलेश्वर न्याय के पदाधिकारियों ने पूरे सम्मान के साथ सागर ताल में विसर्जन किया। यहां पहुंचकर व्यथित हुए न्यास के पदाधिकारियों का कहना था कि धर्म के प्रति लोगों की आस्था तो खत्म हो गई है, लेकिन प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीओपी की प्रतिमाओं के जरिये श्रद्धालु अनजाने में देवी-देवताओं का अपमान तो कर ही रहे हैं, खुद भी पाप के भागीदार बन रहे हैं।
दैनिक भास्कर द्वारा गुरुवार के अंक में हे देवी हमें माफ करना शीर्षक से प्रकाशित की गई फोटो को देखकर शुक्रवार को सुबह न्यास के अध्यक्ष हरिदास अग्रवाल, उपाध्यक्ष विजय कब्जू, सचिव भुवनेश्वर वाजपेयी और उप व्यवस्थापक सचिव विष्णु बंसल रमौआ बांध पहुंचे। यहां देवी प्रतिमा देखने के बाद व्यथित पदाधिकारियों ने देवी प्रतिमा को उठाकर गाड़ी में रखा और सागरताल लाकर पूरे श्रद्धाभाव के साथ उसका विसर्जन किया। इस दौरान आस-पास में पीओपी की कुछ और देवी प्रतिमाओं के भी अवशेष थे, उन्हें भी साथ लेकर आए। विसर्जन से लौटकर श्री अग्रवाल और श्री वाजपेयी ने कहा कि आगे से न्यास अन्य हिंदू संगठनों को साथ लेकर पीओपी की प्रतिमा बनाने और बेचने वालों से सख्ती से पेश आएगा ताकि देवी-देवताओं का अपमान न हो।

रमौआ पहुंचकर व्यथित हुए श्रद्धालु़, कहा - आस्था खत्म हो गईं, प्रदर्शन भर रह गया है
सागरताल में मूर्ति का विसर्जन करते अचलेश्वर न्यास के पदाधिकारी।
सिटी रिपोर्टर| ग्वालियर
शारदीय नवरात्र में विसर्जन के 230 दिन बाद भी रमौआ बांध की सूखी जमीन पर जस की तस रखी पीओपी की देवी प्रतिमा को शुक्रवार को अचलेश्वर न्याय के पदाधिकारियों ने पूरे सम्मान के साथ सागर ताल में विसर्जन किया। यहां पहुंचकर व्यथित हुए न्यास के पदाधिकारियों का कहना था कि धर्म के प्रति लोगों की आस्था तो खत्म हो गई है, लेकिन प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पीओपी की प्रतिमाओं के जरिये श्रद्धालु अनजाने में देवी-देवताओं का अपमान तो कर ही रहे हैं, खुद भी पाप के भागीदार बन रहे हैं।
दैनिक भास्कर द्वारा गुरुवार के अंक में हे देवी हमें माफ करना शीर्षक से प्रकाशित की गई फोटो को देखकर शुक्रवार को सुबह न्यास के अध्यक्ष हरिदास अग्रवाल, उपाध्यक्ष विजय कब्जू, सचिव भुवनेश्वर वाजपेयी और उप व्यवस्थापक सचिव विष्णु बंसल रमौआ बांध पहुंचे। यहां देवी प्रतिमा देखने के बाद व्यथित पदाधिकारियों ने देवी प्रतिमा को उठाकर गाड़ी में रखा और सागरताल लाकर पूरे श्रद्धाभाव के साथ उसका विसर्जन किया। इस दौरान आस-पास में पीओपी की कुछ और देवी प्रतिमाओं के भी अवशेष थे, उन्हें भी साथ लेकर आए। विसर्जन से लौटकर श्री अग्रवाल और श्री वाजपेयी ने कहा कि आगे से न्यास अन्य हिंदू संगठनों को साथ लेकर पीओपी की प्रतिमा बनाने और बेचने वालों से सख्ती से पेश आएगा ताकि देवी-देवताओं का अपमान न हो।
ट्रॉली लेकर जाएंगे ऐसे जलाशयों में
अचलेश्वर न्यास के अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने कहा कि रमौआ के हालात देखने के बाद अब हम एक ट्रॉली लेकर रमौआ और उसके जैसे अन्य सूखे हुए जलाशयों का चक्कर लगाने जाएंगे ताकि पीओपी की और प्रतिमाओं का भी पूरे सम्मान और श्रद्धाभाव से विसर्जन कर सकें।
पीओपी प्रतिमाओं को प्रतिबंधित करने के लिए देंगे ज्ञापन
अचलेश्वर न्यास के सचिव श्री वाजपेयी के अनुसार पीओपी की प्रतिमाओं के निर्माण पर प्रतिबंध के लिए न्यास की ओर से संभागीय कमिश्नर, कलेक्टर और निगम कमिश्नर को ज्ञापन सौंपेंगे। साथ ही अफसरों से यह भी आग्रह करेंगे कि वे शीघ्रता से इस संबंध में आदेश जारी करें, जिससे पीओपी प्रतिमाओं पर रोक लग सके।