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जैव विविधता सहेजने के लिए पेड़ों पर बनाएं श्रीजी संदेश इनको खत्म करोगे तो क्या अकेले ही रहोगे

3 वर्ष पहले
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जीवाजी यूनिवर्सिटी में पेड़-पौधों और पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों को सहेजने के लिए बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित किया गया है। यहां मौजूद 109 दुर्लभ प्रजातियों को सहेजने के लिए यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने नए प्रयोग किए हैं। उन्होंने पेड़ों पर श्रीजी सहित अन्य देवी-देवताओं के चित्रों को बनाया है। साथ ही पक्षियों को बचाने के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं। इनमें संदेश भी लिखे हैं कि यदि हम और आप सभी प्रजातियों को खत्म कर देंगे तो क्या धरती पर अकेले ही रहेंगे। साथ ही पोस्टर में इनकी खासियत का उल्लेख किया गया है। स्टूडेंट्स द्वारा कैंपस में कराए गए सर्वे में यहां मप्र के राज्य पक्षी दूध राज, गोह और दुर्लभ पेड़-पौधों मिले हैं। जेयू के पर्यावरण विज्ञान अध्ययनशाला की ओर से स्टूडेंट्स ने तीन महीने की कड़ी मेहनत से इन दुर्लभ प्रजातियों पर स्टडी की। उन्हीं की स्टडी के आधार पर कैंपस में यह पता लग सका है कि जेयू की इतनी संख्या में जैव विविधता मौजूद है।

बायोडायवर्सिटी-डे आज, जीवाजी यूनिवर्सिटी में देख सकते हैं 109 दुलर्भ प्रजातियां

जेयू कैम्पस में पेड़ पर बनाई गणपति की आकृति।

जेयू में हैं 53 प्रजातियों के वृक्ष

कैंपस में खैर, ब्लैक बबूल, बेल, महारुख, वोमेन टंग ट्री, जैक फ्रूट, कदम, नीम, वेरीगेटेड बाउहिनिया, रेड सिल्क कॉटन, फलेम ऑफ द फोरेस्ट, पिंक पफ, बोटल ब्रश, फिश टेल पाम, इंडियन लेबुरनम, कसोड सिएमिआ, चंपा, रॉयल पाम, ब्लैक प्लम, इमली, टीम, अर्जुन, बहेरा, मेल बंबू जेयू कैंपस में लगे हैं।

56 पक्षियों की प्रजातियां भी हैं कैंपस में: कैंपस में ग्रे फ्रेंकोलिन, इंडियन पीफॉल, व्हाॅइट ब्रेस्टेड वाटरहेन, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, रेड वाटलेड लेपविंग, ग्रेटर पेंटेड स्नाइप, कॉमन रेडशंक, यलो लेग्ड ग्रीन पिजन, ब्लू रॉक पिजन सहित कुल 56 पक्षियों की प्रजाति देखने को मिलती है।

तीन महीने में बनाया रिकॉर्ड: पर्यावरण विज्ञान अध्ययनशाला के एचओडी डॉ. हरेंद्र शर्मा ने बताया कि कैंपस में पेड़-पौधों की बहुतायत है। ऐसे में इनका रिकॉर्ड बनाना बेहद मुश्किल काम था। स्टूडेंट्स ने सुबह और शाम को डाटा इकट्ठा किया और उनके फोटो खींचे। इनमें एम्फीबियन की 3 प्रजातियां, रेप्टाइल की 5 तरह की प्रजातियां भी मिली हैं।

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