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रोजाना 15 बार ऑडियो सुन समझे फॉर्मूले, परीक्षा में लाए अच्छे नंबर

3 वर्ष पहले
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ब्रेल लिपि से गणित की कैलकुलेशन करना, ऑडियो से फॉर्मूला समझा और रोजाना 10 से 15 बार ऑडियो सुनना। अन्य विषयों के आंसर बोल-बोलकर शिक्षक को सुनाए, जिससे बेहतर ढंग से तैयारी कर सके। यह कहना है एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं में बेहतर अंक लाने वाले दिव्यांग छात्र-छात्राओं का। इसके लिए स्कूलों के अलावा सामाजिक संस्थाओं ने दिव्यांगों की सहायता की। इन संस्थाओं ने पढ़ाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया। साथ ही स्पेशल क्लास का भी आयोजन किया। इस आधार पर दिव्यांग छात्र-छात्राएं बेहतर अंक ला सके। 10वीं-12वीं में 350 दिव्यांग परीक्षार्थी सम्मिलित हुए। इसमें 60 प्रतिशत पास हुए।

शहर में दिव्यांग छात्र-छात्राओं ने सॉफ्टवेयर और ऑडियो रिकॉर्डिंग से पढ़ाई कर एमपी बोर्ड की परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया

माधव अंधाश्रम | आश्रम के प्रिंसिपल रामलाल केवट ने बताया कि उनके यहां से कक्षा 10वीं में 5 और कक्षा 12वीं में 2 दृष्टिहीन छात्रों का परीक्षा परिणाम अच्छा रहा। परीक्षा के समय छात्र-छात्राओं को लिखने के लिए एमपी बोर्ड की ओर से राइटर उपलब्ध कराया गया। ऐसे में बच्चों को स्कूल में हर टॉपिक को बार-बार बोलने के लिए कहा गया।

रोजाना 6 घंटे पढ़ाई कर पाई सफलता

कक्षा 10वीं में दृष्टिबाधित श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त करने वाले भूपेंद्र सिंह ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। जहां उनकी मुलाकात दिव्य दृष्टि फाउंडेशन के सदस्यों से हुई। फाउंडेशन ने पढ़ने के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया। इससे रात 11 से सुबह 5 बजे तक पढ़ाई की।

आत्म ज्योति दृष्टिहीन आवासीय स्कूल | स्कूल में 10वीं की परीक्षा में 5 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। वहीं कक्षा 12वीं में कोई भी विद्यार्थी शामिल नहीं हुआ। स्कूल की टीचर रोशनी ने बताया कि बच्चों को सालभर से ही डेजी सॉफ्टवेयर से तैयारी कराई जा रही थी।

दोस्तों ने टॉपिक सुनाकर कराई तैयारी

स्टेट की मेरिट लिस्ट में दृष्टिबाधित श्रेणी में तीसरा स्थान पाने वाले प्रहलाद दांगी ने बताया कि वे रोजाना पिता के साथ खेत पर काम करने जाते थे। लेकिन वह पढ़ना भी चाहते थे। उन्होंने संस्था में रहकर ब्रेल लिपि में नोट्स तैयार किए और दोस्तों से रोजाना अलग-अलग सब्जेक्ट के टॉपिक्स सुने। इससे बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सका।

दिव्यदृष्टि फाउंडेशन| संस्था ने शहर के 7 दृष्टिहीन छात्र-छात्राओं को गोद लिया है। इनमें 2 छात्र-छात्राओं का परिणाम बेहतर रहा है। छात्रों ने बताया कि उन्होंने रोजाना 10 से 12 घंटे तैयारी की। इसके लिए टॉकिंग सॉफ्टवेयर से तैयारी की, जिसका फायदा परीक्षा में मिला।

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