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जीवन जीने की कला सिखाता है अभिनय

3 वर्ष पहले
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अभिनय एक कला मात्र नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास का बेहतर माध्यम है। यह कला हमें जीवन जीने की कला भी सिखाती है। यह बात मुंबई से आए थिएटर डायरेक्टर अविनाश देशपांडे व मनीष शंकर ने कही। वे इन दिनों आईटीएम ग्लोबल स्कूल की थिएटर वर्कशॉप में अभिनय कला की बारीकियां सिखा रहे हैं। वर्कशॉप में प्रतिभागी अभिनय कौशल, कम्युनिकेशन, सोचने व कल्पना करना, शब्दों का उच्चारण, बोलना, आवाज की विविधता, भाव-भंगिमाओं की बारीकियां सीख रहे हैं।

आईटीएम ग्लोबल स्कूल की थिएटर वर्कशॉप में एक्सपर्ट ने दिए छात्र-छात्राओं को टिप्स

ITM ‌Camp

एक्सपर्ट ने कहा कि डायरेक्टर जितना प्यार कला से करता है उतना ही बच्चों से करता है।

स्फूर्ति दिखाने और एकाग्रता के लिए एक्सरसाइज

हम आम बोलचाल में जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वास्तविकता में वो सही भाषा नहीं है। यही कारण है कि 90 प्रतिशत बच्चों को सही शब्द बोलना नहीं आते। हमें सबसे ज्यादा मेहनत उनकी भाषा, संवाद व सम्प्रेषण पर करनी पड़ती है। हम शुरुआत में उन्हें फिजिकली, मेंटली एक्सरसाइज करवाते हैं ताकि उनमें स्फूर्ति दिखे। साथ ही वो खुद को एकाग्र रखकर सिर्फ अपने किरदार में जान डाल सकें।

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