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एडवांस मेंं घटी परीक्षार्थियों की संख्या 42% पर मिल सकता है IIT में प्रवेश

3 वर्ष पहले
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जेईई एडवांस-2018 में शहर से करीब 1500 परीक्षार्थी शामिल हुए। यह पेपर सुबह ओर दोपहर दो सत्रोंे में हुआ

JEE Advance -2018

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

ज्वॉइन एंटेंस एक्जाम (जेईई) एडवांस-2018 का पेपर पहली बार ऑनलाइन हुआ। आईआईटी कानपुर ने इस परीक्षा का आयोजन कराया। इस बार जेईई एडवांस में कुल 1 लाख 64 हजार परीक्षार्थियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि बीते वर्ष इनमें परीक्षार्थियों की संख्या 1.72 लाख थी। इस परीक्षा से देशभर से 2.3 लाख परीक्षार्थियों को एडवांस के लिए रजिस्ट्रेशन कराना था, लेकिन बीते वर्षों की तुलना में परीक्षार्थियों की संख्या कम रही। एक्सपर्ट अज्ञात गुप्ता और बालेंदु चांदिल का कहना है कि जिस प्रकार एडवांस मेेेें परीक्षार्थियों की संख्या कम रही है, उससे कटऑफ नीचे जाने की संभावना है। आईआईटी सीट के लिए 50 फीसदी अंक लाने आवश्यक है। इस बार 42 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर आईआईटी की सीट मिलने की संभावना है। पिछली बार के मुकाबले फिजिक्स का पेपर इस बार कठिन रहा। ऐसे में कटऑफ सौ अंक से भी नीचे जा सकता है।पिछली बार भी क्वालिफाइंग के लिए 126 अंक तय किए गए थे।

दो सत्रों में हुआ एक्जाम

नेट की स्पीड के कारण हल करने में आई परेशानी

ऑनलाइन की इतनी आदत नहीं है अभी तक अधिकतर परीक्षाएं ऑफ लाइन ही दी है। इसलिए ऑनलाइन के पेपर देने में परेशानी हुई।  - अंकुर चंदेरिया

जेईई का पेपर सुबह 9 और दोपहर 2 बजे से शुरू हुए। दोनों पेपर्स में इस बार 54-54 सवाल थे, जिसके लिए 180-180 मार्क्स निर्धारित थे। पेपर-2 में मैथ्स सेक्शन थोड़ा टफ रहा, वहीं केमेस्ट्री के ऑर्गेनिक पार्ट के ट्रिकी सवालों ने छात्रों को उलझाया। पेपर-1 में सिंगल आंसर टाइप सवाल पैराग्राफ पर और पेपर-2 में यह मैच द कॉलम पैटर्न पर दिए गए। मोर दैन वन आंसर टाइप सवालों में तीन सही जवाब में से दो को टिक करने पर,उसके अनुसार ही नंबर दिए जाएंगे।

फिजिक्स का पार्ट काफी टफ रहा

परीक्षा में तीनों सब्जेक्ट में बराबरी से प्रश्न पूछे गए। फिजिक्स सब्जेक्ट काफी टफ था। ऑन लाइन मॉक टेस्ट दिए थे, इसलिए परेशानी नहीं आई।  - तान्या शर्मा

जेईई एडवांस का पेपर देने के बाद बाहर आते परीक्षार्थी।

गणित के प्रश्नों ने ज्यादा उलझाया

ऑनलाइन पेपर देने में ज्यादा परेशानी नहीं आई।गणित के प्रश्न अवश्य उलझाने वाले थे, लेकिन ओवरआॅल पेपर ठीक था।  - मानसी शर्मा

ऑनलाइन के कारण आई परेशानी

जेईई एडवांस में नई व्यवस्था के तहत इंटरनेट ने परेशानी भी आई। इससे छात्रों के वेरिफिकेशन में समय अधिक लगा। इसके बावजूद परीक्षा में 92 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

पिछले वर्ष 366 अंकों का पेपर था, इस बार 360 अंकों का। मैथ्स ट्रिकी था, लेकिन स्टूडेंट्स ने केमिस्ट्री को लेंदी बताया। ओवरऑल देखें, तो पिछले साल की तुलना में पेपर कठिन रहा।

ऑनलाइन पेपर का मिला मुझे फायदा

ऑनलाइन पेपर के ज्यादा फायदे हैं। शुरुआत में मैंने कुछ प्रश्न गलत टिक लग गए थे, जिन्हें समय रहते मैंने सुधार लिया। ऑफलाइन में यह सुविधा नहीं है।  - सक्षम सचदेवा

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