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...नींद से जगाती है, ध्यान ईश्वर का करें तो मां सामने आती है

3 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

ईश्वर मैंने देखा नहीं है, लेकिन जब भी किस्मत ने देखने का मौका दिया तो वह निश्चित ही मां की तरह ही दिखाई देता होगा। मां और ईश्वर की ऐसी ही कल्पना को शब्दों से बयां किया साहित्यकार आलोक शर्मा ने। उन्होंने कहा- हर सुबह वो छुअन आकर नींद से जगाती है, ध्यान ईश्वर का करें तो मां सामने आती है। इटालियन गार्डन में हुई जलेस इकाई ग्वालियर की मासिक काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि राकेश राज भटनागर रहे। अध्यक्षता कवि राम अवध विश्वकर्मा ने की। संचालन मुस्तफा खान ने किया। आभार गंगादीन शाक्य भारती ने जताया। इस मौके पर रचना पाठ हुआ।

आंखों में उतरकर देखो तभी तो दर्द मालूम होगा

मैं वो हूं जो चट्टानों को गुलजार बना दूं, गमलों में मुझे फूल खिलाने नहीं आते।

- डॉ. राकेश राज भटनागर

घास सूखने लगी फूल मुरझा गए, आदमी को जिंदा जला रही है तपन।

- कमलेश बाबू मंगल

कैसे लिखने वाले उलझ गए राजनीति-सरकारों में, मुंह देखी खबर छपी है बड़े-बड़े अखबारों में । - गंगादीन शाक्य

भारतीय आदमी! गलतियों का पुतला है, किसकी गलतियों का, आदमी की.. क़ुदरत की.. या खुदा की...?

- मुस्तफा खान

वो किस तरह मुकरते जबान दे बैठे, कभी कचहरी में झूठा बयान दे बैठे।

- राम अवध विश्वकर्मा

नब्ज टटोलकर देखो तभी तो मर्ज मालूम होगा, आंखों में उतरकर देखो तभी तो दर्द मालूम होगा।

- उमेश कुशवाह

जिंदगी-जिंदगी है खिलौना नहीं, इक हकीकत है सपन सलोना नहीं।

- रेखा दीक्षित

वो और तुम तो सफा एक से निकले, दिल्ली के शहजादे एक से निकले।

- अतुल पाठक

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