महाराज बाड़ा के पास दर्जी ओली में एसबीआई के ग्राहक सेवा केंद्र पर खाता खुलवाने के लिए लगी ग्राहकों की भीड़।
अठारह वर्ष से कम उम्र के छात्रों के जीरो बैलेंस वाले खाते अब बैंकों ने खोलना बंद कर दिए हैं। ऐसे खाते खुलवाने के लिए बैंक या कियोस्क सेंटर पहुंच रहे छात्रों को उनके माता-पिता के अकाउंट से लिंक करने की बात कही जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग से मिलने वाली स्कॉलरशिप के लिए छात्रों को अकाउंट की जरूरत है, लेकिन छात्रवृत्ति की राशि आने के बाद स्टूडेंट्स अकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं। इसके बाद सालभर इन खातों में लेन-देन नहीं होता है और अकाउंट निष्क्रिय हो जाते हैं। इसके चलते बैंक इन खातों को खोलने में आनाकानी कर रहे हैं।
हजार छात्रों की स्कॉलरशिप रुकी
करोड़ रुपए बांटे जाते हैं हर साल
1.80 लाख छात्रों को मिलती है स्कॉलरशिप
ग्वालियर जिले में पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों की संख्या 1.80 लाख हैं। पहले इन छात्रों को आदिम जाति कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर निगम आदि से छात्रवृत्ति मिलती थी, लेकिन अब यह राशि सीधे ही स्कूल शिक्षा विभाग को ट्रांसफर कर दी जाती है। स्कूल शिक्षा विभाग अपने रिकॉर्ड के मुताबिक इसे छात्रों के खातों में ट्रांसफर करता है।
शिकायत आने पर एक्शन लेंगे
 अब 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट उनके माता-पिता के अकाउंट से लिंक कर ही खोले जाएंगे, लेकिन 12 वर्ष से अधिक आयु के छात्रों के खाते सीधे ही खोले जा सकते हैं। पुराने खातों का लंबे समय तक संचालन न होने के कारण वे बंद हुए होंगे। हमें इस संबंध में कोई शिकायत मिलती है, तो हम एक्शन लेंगे। डीके जैन, लीड बैंक मैनेजर, ग्वालियर
खातों का वेरीफिकेशन करा रहे हैं
 यह सही है कि कई छात्रों के खाते बंद हो गए हैं। हमने जब इसकी जानकारी जुटाई तो 15 हजार से अधिक छात्र ऐसे पाए गए थे। अब उनके खातों का वेरीफिकेशन कराया जा रहा है। अगर किसी ने गलत अकाउंट नंबर लिखा है, तो उसे करेक्ट कराया जा रहा है। अब पूरे प्रदेशभर में वन क्लिक के माध्यम से छात्रों के खातों में स्कॉलरशिप की राशि भेजी जाएगी। फिर भी कुछ छात्र रह जाते हैं, तो उन्हें मैनुअली छात्रवृत्ति का वितरण किया जाएगा। जहां तक खाते न खुलने की बात है, तो नए सत्र में हम इस संबंध में लीड बैंक मैनेजर से चर्चा कर समस्या का हल निकालेंगे। आरएन नीखरा, जिला शिक्षा अधिकारी