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बहुचर्चित हिरणवन कोठी डकैती मामले में फैसला

3 वर्ष पहले
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फैसला सुनकर खिले चेहरे: 35 साल पुराने मामले में अदालत की ओर से बरी किए जाने के बाद कोर्ट में उपस्थित आरोपियों के चेहरे खिल उठे। कोर्ट परिसर में ही हमारे फोटो जर्नलिस्ट ने यह फोटो क्लिक किया।

रविन्द्र सिंह भदौरिया

बरी होने के बाद बोले- 35 साल तक आरोपी रहना कष्टदायी रहा, कोर्ट का शुक्रिया

ग्वालियर। 35 साल पुराने हिरणवन कोठी डकैती मामले में शुक्रवार को आए फैसले से इस बहुचर्चित कांड का पटाक्षेप हो गया। फैसला सुनने के बाद कोर्ट में उपस्थित दोषमुक्त किए गए आरोपियों का दर्द खुशी के साथ छलक आया। सभी ने कहा- आरोपी के तौर पर इतने साल समाज में रहना कष्टदायी रहा। कोर्ट ने अब भरपाई की, शुक्रिया।

उदयवीर सिंह

अशोक शर्मा

अरुण तोमर

रमेश शर्मा

प्रतिक्रिया

न हिरणवन कोठी देखी न कभी पैर रखा। पूरा प्रकरण राजनीतिक था। 35 साल तक आरोपी बने रहना कष्टकारी रहा। -बाल खांडे

सत्य की विजय हुई है। समय जरूर लगा लेकिन न्यायालय पर पूरा विश्वास था। -रविंद्र सिंह भदौरिया

सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। हम सभी सत्य के रास्ते पर थे। - अशोक शर्मा

आरोपी के तौर पर सामाजिक प्रतिष्ठा का जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आज माननीय न्यायालय ने अपने निर्णय से कर दी। -अरुण सिंह तोमर

असत्य पर सत्य की विजय हुई है। हमने न्यायालय में विश्वास रखते हुए आरोपों का डटकर मुकाबला किया। न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं। -रमेश शर्मा

यह है हिरणवन कोठी जिसको लेकर हुआ था विवाद

यह है मामला: 11 अक्टूबर 1983 को सरदार एससी आंग्रे की पुत्री श्रीमति चित्रलेखा ने कोर्ट में परिवाद पेश कर आरोप लगाया था कि 13 अगस्त 1983 को शाम 5-6 बजे के बीच माधवराव सिंधिया को छोड़कर शेष आरोपी अपने साथियों के साथ कोठी पर आए और कर्मचारी व चौकीदारों को बंदूक की नोक पर खदेड़ दिया। घर में पांच पालतू कुत्ते थे, जिनमें से केवल 2 मिले, एक को मार डाला और 2 कुत्तों व घरेलू सामान आरोपीगण अपने साथ ले गए। घटना के समय सरदार एससी आंग्रे इंग्लैंड गए हुए थे और वे स्वयं दिल्ली में थी। फोन पर उन्हें घटना की जानकारी दी गई।

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