सिंधिया परिवार का मामला: केस से जुड़े 16 आरोपियों में से माधवराव सिंधिया सहित 5 की हो चुकी है मौत, 36 में से 13 गवाहों का भी निधन
लीगल रिपोर्टर|ग्वालियर
सिंधिया परिवार से जुड़े शहर के बहुचर्चित हिरणवन कोठी डकैती कांड में 415 माह (लगभग 35 साल) बाद शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश रविंदर सिंह ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सभी 16 आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया सहित पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह मामले के 36 गवाहों में से 13 लोगों का निधन हो चुका है। इनमें राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पूर्व सांसद नारायण कृष्ण शेजवलकर, सरदार एससी आंग्रे, पूर्व मंत्री शीतला सहाय, पूर्व विधायक आैर महापौर रहे माधवशंकर इंदापुरकर शामिल हैं। इस पूरे मामले में खास बात यह रही कि परिवादी चित्रलेखा आंग्रे ट्रॉयल के दौरान एक भी बार कोर्ट में उपस्थित नहीं हुईं। जबकि उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया था। शेष|पेज 13 पर
26 दिन में कराई गवाही और सुना दिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष पांच साल से अधिक वर्ष पुराने प्रकरणों को जल्द से जल्द निराकृत करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में चार अप्रैल को विशेष न्यायाधीश रविन्दर सिंह ने 23 से लेकर 27 अप्रैल के बीच कुल 35 गवाहों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया। 14 से 18 मई तक गवाहों के कथन दर्ज कराए गए और न्यायालय ने अपना फैसला भी सुना दिया। हालांकि आज हुई गवाही में गणपत ने बताया कि घटना वाले दिन चंद्रकांत व महेंद्र प्रताप सिंह वहां मौजूद थे और उनके हाथ में हथियार भी थे। दोनों ने उसे भगा दिया था।
इन्हें बनाया था आरोपी
माधवराव सिंधिया, चंद्रकांत मांढरे, महेंद्र प्रताप सिंह, नरेंद्र सिंह, शरद शुक्ला (इन सभी का निधन हो चुका है), केपी सिंह (पूर्वमंत्री) अशोक शर्मा, अरुण सिंह तोमर ( अब भाजपा में) राजेंद्र सिंह तोमर, राम उर्फ मुन्ना भार्गव, विलासराव लाड, बाल खांडे, उदयवीर सिंह, रविंद्र सिंह भदौरिया, अमर सिंह भोंसले, रमेश शर्मा।
इन धाराओं में लगे थे आरोप
धारा 395 सहपठित धारा 397 भारतीय दंड संहिता विकल्प में धारा 120 बी सहपठित धारा 395 भारतीय दंड संहिता सहपठित धारा 13 मप्र डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981 व धारा 452 तथा 506 बी भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया था।