कलाकार को बढ़ावा देने की बात हर कोई करता है, लेकिन इसके प्रति सरकार गंभीर नहीं है। वर्ष 1998 के बाद शासकीय स्कूलों में फाइन आर्ट का सब्जेक्ट बंद होने के बाद बीएफए और एमएफए पासआउट युवाओं को जॉब नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा यदि वह अपनी कलाकृति बना भी ले तो इसे खरीदने वाले भी तलाशे नहीं मिलते हैं। यदि कलाकार को बढ़ावा देना है तो इसके लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। यह बात गवर्नमेंट हमीदिया कॉलेज के पेंटिंग एंड ड्राइंग डिपार्टमेंट के रिटायर्ड एचओडी डॉ. एलएन भावसार ने सिटी रिपोर्टर से विशेष चर्चा में कही। वह फाइन आर्ट कॉलेज और म्यूजिक यूनिवर्सिटी में सेमिनार में बतौर वक्ता संबोधित करने के लिए शहर में आए हुए थे।
शहर आए वरिष्ठ कलाकार डॉ. एलएन भावसार ने किया अपना दर्द बयां
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चित्र बनाते डॉ. एलएन भावसार।
राजा रवि वर्मा से लेनी चाहिए युवाओं को सीख
डॉ. भावसार ने कहा कि युवाओं को राजा रवि वर्मा से सीख लेना चाहिए। वह एक बेहतर चित्रकार थे, लेकिन इसकी कद्र न तो उनकी प|ी को थी और न ही उस समय समाज के लोगों को। हर किसी का उस समय यह मानना था कि राज परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति को भला पेंटिंग की जानकारी कहां होगी, लेकिन जब इंटरनेशनल फेस्ट मेंं उनकी बनाई हुई पेंटिंग विश्वभर में प्रथम आई तब विश्वभर ने उनकी कलाकृति की कद्र की। इसी प्रकार युवाओं को चाहिए कि वह भी अपने लक्ष्य में तब तक लगे रहना चाहिए जब तक वह उन्हें हासिल नहीं हो जाए।