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राजा बाक्षर मंदिर में चल रही भागवत कथा में

3 वर्ष पहले
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आज के दौर में मनुष्य मतलब के लिए एक दूसरे से मित्रता करते हैं। यदि मित्रता करनी है तो कृष्ण सुदामा जैसी होनी चाहिए। ऐसी नि:स्वार्थ मित्रता आज के दौर में देखने को भी नहीं मिलती। यह बात राजा बाक्षर मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में सुश्री गुंजन वशिष्ठ ने कही।

उन्होंने कहा कि प्रभु को आप जिस रूप में देखते हैं वे उसी रूप में आपकी मदद के लिए दौड़े चले आते हैं। सुश्री वशिष्ठ ने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण को श्राप से बचाने के लिए सुदामा जी ने पूरे चने खा लिए थे। उन्होंने बताया कि एक बुजुर्ग महिला के घर में कीमती वस्तु होने के लालच में चोर महिला की चने की पोटली उठाकर भाग गया था। लेकिन वह घबराकर चने की पोटली उस आश्रम में छोड़ गया जिसमें श्रीकृष्ण और सुदामा रहते थे। जब बुजुर्ग महिला को पोटली चोरी होने का पता चला तो उसने श्राप दे दिया। जैसे ही पोटली सुदामा जी के हाथों में आई तो उन्हें श्राप का पता चल गया और उन्होंने श्री कृष्ण को श्राप से बचाने के लिए पूरे चने खा लिए।

मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी: गुंजन

मुकुंद कृष्णा सिटी में भागवत कथा 21 से

सिरौल रोड पर स्थित मुकुंद कृष्णा सिटी में 21 अप्रैल से भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। वृंदावन स्थित मलूकपीठ के स्वामी राजेंद्र दास महाराज भक्तों को कथा सुनाएंगे। श्री अवस्थी ने बताया कि 21 अप्रैल को सुबह 7.30 बजे दुर्गा मंदिर से कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली जाएगी। कथा दोपहर 3 से शाम 7 बजे तक होगी। हवन एवं प्रसाद वितरण 28 अप्रैल को दोपहर 2 बजे से होगा। कथा के परीक्षित पं. बालमुकुंद अवस्थी और कृष्णादेवी होंगे।

कलश यात्रा के साथ आज से शुरू होगी भागवत कथा: ऋषि सेवा समिति के तत्वावधान में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा का शुभारंभ होगा। भागवत कथा का पाठ 19 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच होगा। प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक सनातन धर्म मंदिर में राघव ऋषि महाराज भक्तों को कथा सुनाएंगे। कथा के मुख्य यजमान यशवीर शर्मा और सुमन शर्मा होंगी।

3 मई को आएंगे स्वामी गौतमानंद महाराज: रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के सह संघाध्यक्ष स्वामी गौतमानंद महाराज 3 मई को शताब्दी एक्सप्रेस से ग्वालियर आएंगे। यह जानकारी स्वामी सुप्रदीप्तानंद महाराज ने दी।

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