पानी में मिलाई क्लाेरीन, पोटेशियम परमैगनेट तो कम हुआ पीलापन
मोतीझील के जल शोधन संयंत्र पर सोमवार से शुरू किया गया वाटर ट्रीटमेंट का असर दिखाई देने लगा है। शिंदे की छावनी क्षेत्र में रविवार को पीला पानी आया था। एक दिन छोड़कर मिल रहे पानी में मंगलवार को शिंदे की छावनी क्षेत्र का टर्न था। वहां पानी साफ आया। याद रहे तापमान बढ़ने से तिघरा डैम में काई फूलकर पानी में मिल रही है। इससे पानी में आयरन की मात्रा बढ़ गई और उसमें क्लोरीन मिलाने से पानी की रंग पीला हो गया था। इसे साफ करने के लिए प्लांट पर तैनात तकनीकी अधिकारियों ने पानी को फिल्टर करने से पहले उसमें क्लोरीन मिलाना और पोटेशियम परमैगनेट मिलाना शुरू किया था। इसका परिणाम मंगलवार की पेयजल सप्लाई में दिखा, जब पानी के पीलेपन में कमी आई।
शहर के कुछ क्षेत्रों में रविवार और सोमवार को पीला पानी आ रहा था। ट्रीटमेंट के बाद पानी का रंग फिर से पुराने रूप में नजर आने लगा है। शिंदे की छावनी मे रहने वाले किशनलाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पानी पीला आ रहा था। अब इसमें सुधार हुआ है।
सीवर भरने से गंदे पानी की समस्या: शहर की सीवर लाइनें चोक होने के कारण तमाम क्षेत्रों में लोकल कारणों से गंदे पानी की समस्या भी सामने आ रही है। इसे लेकर सीवर सेल का अमला लाइनों की सफाई का काम भी तेजी से कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष कृष्ण राव दीक्षित का कहना है कि सुभाषनगर, लाइन नंबर 1, 2 और 8 से क्षेत्रवासियों के सोमवार को फोन आए थे कि पीला और गंदा पानी आ रहा है। कुछ क्षेत्रों में सीवर की लाइन टूटी पड़ी हैं। लाइन सुधार के लिए शिकायत की जा चुकी है। अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।