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रजिस्ट्रार बोले- 3.22 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलती है, वेतन के लिए चाहिए 80 करोड़

3 वर्ष पहले
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जीवाजी यूनिवर्सिटी सहित प्रदेश की 7 यूनिवर्सिटी में स्टाफ के वेतन-भत्ते में खर्च होने वाली राशि व शासन द्वारा दी जानी वाले ब्लॉक ग्रांट को लेकर भोपाल में मंगलवार को उच्च शिक्षा आयुक्त नीरज मंडलोई ने बैठक ली। जेयू से इस बैठक में रजिस्ट्रार प्रो. आनंद मिश्रा व डिप्टी रजिस्ट्रार आईके मंसूरी ने भाग लिया। रजिस्ट्रार ने आयुक्त के सामने जेयू के स्टाफ की जानकारी देते हुए कहा कि अभी शासन से 3.22 करोड़ रुपए की ग्रांट हर साल दी जाती है। जबकि यूनिवर्सिटी वेतन भत्तों पर 36 करोड़ रुपए सालाना खर्च कर रही है। जेयू में जो लेक्चरर पद पर नियुक्त हुए थे वे अब सब करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफेसर बन चुके हैं। इनकी सैलरी सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए के बीच है। जबकि शासन ग्रांट जो दे रहा है वह लेक्चरर के हिसाब से भुगतान कर रहा है। रजिस्ट्रार ने कहा कि जेयू को भविष्य के हिसाब से स्टाफ के वेतन-भत्ते देने के लिए कम से कम 80 करोड़ रुपए की ग्रांट सालाना मिलना चाहिए। रजिस्ट्रार ने कहा कि इस साल 87 लाख रुपए की ग्रांट शासन से कम मिली है।

यूनिवर्सिटी के भविष्य में होने वाले स्टाफ के वेतन- भत्ते को खर्च को देखते हुए जेयू को हर साल 80 करोड़ रुपए की ब्लॉक ग्रांट देने की मांग की है। प्रो. आनंद मिश्रा, रजिस्ट्रार, जेयू

आर्थिक अनियमितताओं की करो जांच: महक सिंह

ग्वालियर|जेयू
के पूर्व एफसी महक ने उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि यूनिवर्सिटी में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में शासन को अवगत कराया किया था। फिर भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया। श्री सिंह ने पत्र में लिखा है कि उनका ट्रांसफर जेयू से हो चुका है। लेकिन अब तक वेतन नहीं दिया गया। साथ अंतिम वेतन प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला का कहना है कि एफसी के वेतन भुगतान व अंतिम वेतन प्रमाण पत्र की फाइल अब तक उनके पास नहीं आई। इसकी जानकारी रजिस्ट्रार ही दे सकते हैं।

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