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पॉलीथिन का उपयोग; कोर्ट ने केंद्र व राज्य से मांगा जवाब

3 वर्ष पहले
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राेक के बावजूद प्रदेश में पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य शासन से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस दौरान शासन की ओर से कहा गया कि आदेश का पालन कराने का जिम्मा नगर निगम का है, इस पर कोर्ट ने निगम को भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि 24 मई 2017 को राज्य शासन ने अधिसूचना जारी कर पॉलीथिन के उत्पादन, संग्रहण, परिवहन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इसे लेकर की गई दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि बड़े दुकानदार खुद व खुद कपड़े के थैले या निर्धारित मापदंड के कैरी बैग का उपयोग करने लगे हैं। इससे प्लास्टिक कैरी बैग की खपत आधी रह गई है। नगर निगम यदि थोड़ी सी सख्ती करे तो प्रतिबंधित पॉलीथिन बैग का उपयोग पूरी तरह से बंद हो सकता है।

खपत 50% तक घटी, सख्ती हो तो बंद हो जाएगी पॉलीथिन

निगम की लापरवाही

छह माह में नहीं चलाया गया पॉलीथिन जब्त करने का अभियान

पहले 1200 किलो पॉलीथिन बिकती थी, अब 600 किलो

प्रतिबंध से पहले शहर में रोज लगभग 1200 किलोग्राम पॉलीथिन बैग का उपयोग होता था। अब यह मात्रा घटकर 600 किलोग्राम रह गई है। हालांकि शहर में कुछ फैक्टरियों में अभी भी पॉलीथिन बैग का निर्माण किया जा रहा है। ऐसा इसलिए कि नगर निगम ने पिछले छह महीने से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। जो भी दुकानदार निर्धारित मापदंड के कैरीबैग और कपड़े के थैले या लिफाफे का उपयोग कर रहे हैं, वे स्वयं ऐसा कर रहे हैं। ठेले, सब्जी वाले और छोटे दुकानदार अब भी प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं।

महंगा फिर भी 51 माइक्रोन के पॉलीथिन बैग और लिफाफे का उपयोग बढ़ा

शहर में पॉलीथिन के कैरी बैग पर प्रतिबंध लगने के बाद से कपड़े के थैले, 51 माइक्रोन की पॉलीथिन के कैरी बैग और लिफाफे का उपयोग बढ़ा है। दुकानदारों का कहना है कि प्रतिबंधित पॉलीथिन बैग के मुकाबले यह 50 से 100 फीसदी तक महंगे आते हैं। प्रतिबंधित कैरी बैग जहां 60 पैसे से एक रुपए तक आता है वहीं 51 माइक्रोन का कैरीबैग और कपड़े के थैले की कीमत 2 से 2.50 रुपए है। हालांकि प्रतिबंधित कैरी बैग 60 से 150 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचे जाते हैं, जबकि लिफाफे 40 से 60 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से बेचे जाते हैं। अखबारी कागज के लिफाफे 35 से 40 और खाकी कागज के लिफाफे 55 से 60 रुपए किलोग्राम मिलते हैं।

यह हो रहा है नुकसान

जिंसी नाला, नौगजा रोड सहित अन्य स्थानों पर जलभराव का कारण नालियां और सीवर लाइन का पॉलीथिन से बंद हो जाना है। सीवर का पानी खींचने के लिए बनाए गए पंपिंग स्टेशन के पंप भी सीवर लाइनों से आई पॉलीथीन के कारण बंद हो रहे हैं।

पॉलीथिन में फेंका गया कचरा खाकर बीमार गाएं गौशाला पहुंच रही हैं, प्रतिदिन 8 से 10 गायों की मौत हो रही है।

पॉलीथिन से लोगों को कैंसर का खतरा रहता है।

और ये संस्था बांट रही कपड़े के थैले

लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से समाजसेवी संस्थाओं ने भी कपड़े के थैले बांटने का काम शुरू किया था। ग्वालियर विकास समिति के कोषाध्यक्ष प्रेम बरोनिया कहते हैं कि उनकी संस्था 2 लाख से ज्यादा कपड़े के थैले बांट चुकी है। 15 अगस्त के बाद फिर से थैले बांटने का अभियान चलाया जाएगा।

प्रतिबंधित पॉलीथिन बैग का उपयोग घटा

पॉलीथिन के कैरीबैग का उपयोग पिछले एक साल में काफी कम हुआ है। अब 51 माइक्रोन के पॉलीथिन बैग और कपड़े के थैलों का उपयोग ज्यादा होने लगा है। जवाहर हीरानी, पैकिंग मेटेरियल विक्रेता

कागज के लिफाफे की बिक्री 30% तक बढ़ी है। पॉलीथिन का उपयोग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अभय गुप्ता, लिफाफा निर्माता

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