नगर निगम ने खस्ता हाल पड़े बाल भवन के ऑडिटोरियम के साथ-साथ भवन की रौनक लौटाने की शुरूआत कर दी है। ऑडिटोरियम की हालत काफी खराब थी। कुर्सियां टूटी पड़ी थीं, लाइट भी नहीं जलती थीं। अब यह वातानुकूलित कर दिया गया है। आकर्षक सोफे और कुर्सियां लगाई गई हैं। निगम जीर्णोद्घार कार्य पर 60 लाख रुपए की राशि खर्च कर रहा है।
बच्चों के मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यों के लिए बाल भवन तैयार किया गया था। इसके ऑडिटोरियम में कई कार्यक्रम होते रहे। देखरेख के अभाव में यह काफी खराब हालत में पहुंच गया था। अब ऑडिटोरियम में पुरानी वायरिंग बदलकर नई वायरिंग डाली गई है। पीछे की तरफ एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई हैं, जिससे पीछे बैठे दर्शकों को मंच पर चल रहे कार्यक्रम साफ दिख सकें। निगम ने बाल भवन के पीछे के क्षेत्र को भी अच्छा कर दिया है। वहां पर दो बगीचे भी बनाए जा रहे हैं।
इधर ध्यान देने की जरूरत
बाल भवन का मुख्य आकर्षण बगीचा है। तत्कालीन नगर निगम आयुक्त वेदप्रकाश शर्मा के कार्यकाल में यह तैयार किया गया था। यहां पर शाम को काफी लोग अपने परिवार के साथ मनोरंजन के लिए आते हैं। देखरेख के अभाव में खूबसूरत बगीचा दिनों-दिन खराब होता जा रहा है। यहां लगे झूले व फिसलपट्टी भी खराब हो गई हैं। गौरतलब है कि सुंदर बगीचा बनने से पहले बाल भवन में शादी समारोह होते रहे थे।
60 लाख रुपए खर्च कर बदला बालभवन का स्वरूप
नए स्वरूप में बाल भवन का ऑडिटोरियम।