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अस्पताल की जमीन हस्तांतरित करने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, केन्द्र से मांगा जवाब

3 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने गोला का मंदिर स्थित 20 एकड़ जमीन के संबंध में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति संजय यादव व न्यायमूर्ति एके जोशी की युगलपीठ ने केंद्र को जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है साथ ही मप्र शासन को जमीन हस्तांतरित करने से मना किया है।

आरसी मिश्रा ने अमित लाहोटी के माध्यम से जनहित याचिका दायर करते हुए गोला का मंदिर स्थित जमीन पर अस्पताल निर्माण की मांग की है। याची ने न्यायालय को बताया कि रक्षा विभाग से उक्त जमीन केवल इसी शर्त पर मिली थी कि इस पर अस्पताल का निर्माण किया जाएगा। लेकिन तीन दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अस्पताल नहीं बन पाया। हालांकि मप्र शासन की ओर से अपने जवाब में ये कहा गया कि शहर में अन्य बड़े अस्पताल खोले जा रहे हैं। ऐसे में और अस्पताल बनाने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही ये भी बताया गया कि उक्त भूमि का कुछ हिस्सा महिला एवं बाल विकास विभाग को कामकाजी महिला आवासगृह बनाने के लिए हस्तांतरित भी किया जा चुका है।

शासन को झटका

गोला का मंदिर स्थित जमीन पर महिला आवास गृह का निर्माण किया जा रहा है।

अस्पताल की जमीन का सफर एक नजर में

1986 में रक्षा विभाग ने अस्पताल के लिए मप्र शासन को जमीन दी और 4 सितंबर 1987 को मप्र शासन ने जमीन स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित की। 1994 तक जब कोई कदम नहीं उठाए गए तब रक्षा मंत्रालय ने पत्र लिखकर जमीन वापस मांगी। इस पर मुकेश अग्रवाल मेमोरियल ट्रस्ट को जमीन लीज पर दी गई। शासन की ये पहल भी रंग नहीं लाई और 2003 में ट्रस्ट ने एस्कोर्ट्स हॉर्ट इंस्टीट्यूट को जमीन दे दी लेकिन 2012 में उक्त संस्था ने भी हाथ खड़े कर दिए।

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