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एक साथ तीन बच्चियां, वजन कम, 24 दिन डॉक्टरों ने रखा सतत निगरानी में, बचा ली जान

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर| आमतौर पर तीन बच्चे एक साथ होने के बाद इनमें से एक बच्चे की जान का जोखिम बन जाता है। केआरएच के पीडियाट्रिक विभाग ने विजयपुर से गंभीर हालत में आई तीन जुड़वां नवजात बच्चियों को नया जीवन दे दिया। यह पहला मौका है कि इस तरह के बच्चे न केवल बच गए बल्कि उनका वजन भी बढ़ गया।

विजयपुर के भामनी गांव निवासी जंडेल सिंह की प|ी नीरज को 25-26 अप्रैल की रात में विजयपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां नीरज ने तीन जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। बच्चियों की स्थिति देखकर डॉक्टरों ने केआरएच के एसएनसीयू के लिए रैफर कर दिया। तीनों बच्चियों को गंभीर हालत में 26 अप्रैल को दोपहर 12 बजे भर्ती किया गया। जब बच्चियां भर्ती हुईं, उस समय एक बच्ची का वजन 700 ग्राम और दो का वजन 800 ग्राम से कम था। विशेषज्ञों की मानें तो एक ही लिंग के बच्चे हैं। यह तब होता है जब सोनोजाइगोटिक एक ही प्लैसेंटा से जुड़े होते हैं। सामान्य बच्चे का वजन जन्म के समय 1000 ग्राम होना चाहिए,लेकिन ऐसे बच्चों का वजन कम होता है। इसका कारण यह है कि इनकाे न्यूट्रीशियन ठीक से नहीं मिल पाता है। इन बच्चियों को एसएनसीयू में एक निश्चित तापमान पर रखा गया। पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रीशियन दी गई।

नवजातों को गोद में लिए डॉक्टर्स की टीम।

तीनों बच्चियां गंभीर हालत में आई थी। इन्हें निगरानी में रखा गया जिसके कारण इनका जीवन बच सका है। इन बच्चियों को हर माह फॉलोअप के लिए बुलाया जाएगा। डॉ. अजय गौड़, विभागाध्यक्ष पीडियाट्रिक विभाग, जीआरएमसी

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