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रिजल्ट बेहतर बनाने के लिए भवन और अन्य सुविधाओं का अभाव भी नहीं बनने दिया रोड़ा

3 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों के न भवन अच्छे न सुविधाएं। ऐसे में कैसे पढ़ पाएंगे बच्चे? इस मिथक को दूर करने के लिए जब कुछ स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों ने ठाना तो वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। हर 10 बच्चों के ऊपर एक शिक्षक को गार्जियन बनाया। ड्यूटी के बाद और छुट्टी के दिन भी कक्षाएं लगाईं। इतना ही नहीं बच्चों के घर पर जाकर भी उनकी पढ़ाई की स्थिति का आंकलन किया। परिणाम स्कूल का हर बच्चा बेहतर डिवीजन से हायर सेकेंडरी और हाई स्कूल की परीक्षा में पास हुआ। ये कहानी किन्हीं एक या दो स्कूलों की नहीं बल्कि जिले के 17 सरकारी स्कूलों की है। बोर्ड परीक्षा में स्कूल का कोई भी छात्र फेल नहीं हो सके इसके लिए जुलाई से ही ऐसे स्कूलों ने नियमित क्लास के साथ एक्स्ट्रा क्लास लगवाई गई। जिले में शासकीय हायर सेकंडरी मॉडल स्कूल, मुरार का 12 वीं के छात्रों का 100 फीसदी रिजल्ट आया है। हालांकि जिले में हाईस्कूल परीक्षा का परिणाम 62.86 फीसदी व हायर सेकंडरी का 59.55 फीसदी रहा है।

छात्रों के गार्जियन बनकर संभाली जिम्मेदारी, छुट्टी के दिन भी लगाईं कक्षाएं, नतीजा... परीक्षा परिणाम रहा 100 फीसदी

मॉडल स्कूल: 14 में से 8 टीचर थे फिर भी 100 फीसदी छात्र हुए पास

सरकार द्वारा 2011 में शासकीय हायर सेकंडरी मॉडल स्कूल की स्थापना की गई थी। इसके बाद इस स्कूल के 10 वीं व 12 वीं के 90 से 95 फीसदी छात्र पास हो रहे थे। पिछले वर्ष रवींद्र शर्मा स्कूल के प्रिंसिपल बने और उन्होंने ठान लिया कि इस बार 10 वीं व 12 वीं का रिजल्ट हर हाल में 100 फीसदी आना चाहिए। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक 10 छात्रों पर एक गार्जियन टीचर नियुक्त किया। 14 स्वीकृत पदों पर 8 शिक्षक होने पर अतिथि विद्वान रखे। इसके बाद कमजोर बच्चों की एक्स्ट्रा क्लास लगवाई जिसके चलते स्कूल का रिजल्ट 100 फीसदी आया।

मुरार उत्कृष्ट स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे। फाइल फोटो।

न खुद का भवन न बिजली, कुछ विषयों के टीचर तक नहीं

मुरार ब्लॉक के अंतर्गत शासकीय हाईस्कूल पारसेन के प्रिंसिपल शांतनु चौहान ने बताया कि उनके स्कूल के पास खुद का भवन नहीं है। प्राइमरी व मिडिल स्कूल में क्लास लगा रहे हैं। फिर भी उनके स्कूल के 10 वीं के छात्रों का लगातार 4 साल से 100 फीसदी रिजल्ट आ रहा है। उन्होंने बताया कि किसी भी बच्चे को कोचिंग में नहीं पढ़ने दिया। उन्होंने टीचर्स की मदद लेकर छुट्टी के दिन क्लास लगवाई। इसी तरह शासकीय हाईस्कूल सिरसौद के प्रिंसिपल कुसुम चौहान ने बताया कि उनके स्कूल में बिजली नहीं है। हिंदी व संस्कृत विषय का टीचर नहीं थे। वहीं हाईस्कूल बिल्हेटी के प्रिंसिपल अशोक दीक्षित व हाईस्कूल के रोरा के प्रिंसिपल जगदीश अग्रवाल का कहना था कि स्कूल में भले ही संसाधनों की कमी रही हो लेकिन टीचर्स की पढ़ाने की जिद से स्कूल का बेहतर रिजल्ट आया है।

सफलता के यह हैं 5 प्रमुख कारण

स्कूल खुलते ही नियमित तौर पर क्लास लगाना।

पढ़ाई में कमजोर व टॉपर छात्रों को चिन्हित कर उनकी छुट्टी के दिन अलग-अलग एक्स्ट्रा क्लास लगाना।

प्रत्येक यूनिट का सप्ताह में टेस्ट लेना। अच्छे नंबर नहीं लाने पर उसी यूनिट की फिर से तैयारी करवाना।

प्रत्येक छात्र की मॉनीटरिंग के लिए गार्जियन टीचर प्रिंसिपल द्वारा नियुक्त करना।

छात्र के स्कूल न आने पर बच्चे के पालक से सीधे संपर्क करना।

10वीं के इन स्कूलों के छात्र हुए 100 फीसदी पास

ब्लॉक स्कूल का नाम

मुरार हायर सेकंडरी मॉडल स्कूल मुरार

मुरार हायर सेकंडरी आवासीय वि. ग्वालियर

मुरार शासकीय हाईस्कूल सिरसौद

मुरार शासकीय हाईस्कूल बिलारा

मुरार शासकीय हाईस्कूल बिल्हेटी

मुरार शासकीय हाईस्कूल पारसेन

मुरार शासकीय हाईस्कूल रोरा

मुरार शासकीय हाईस्कूल जमाहर

भितरवार शासकीय हाईस्कूल फतेहपुर

भितरवार शासकीय हाईस्कूल समाया

घाटीगांव शासकीय हाईस्कूल, नयागांव

घाटीगांव शासकीय हाईस्कूल, हुकुम-गढ़

घाटीगांव शासकीय हाईस्कूल, बरूआ

डबरा शासकीय हाईस्कूल, बड़ेरा बुर्जुग

डबरा शास. हाईस्कूल, सिमरिया ताल

डबरा शासकीय हाईस्कूल, बगेह

डबरा शासकीय हाईस्कूल, गढ़ी

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