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पत्नी के मुंह से निकला; मैं कहती थी कहीं ऐसा- वैसा न हो जाए लेकिन किसी ने सुना नहीं, फिर हो गईं बेहोश

3 वर्ष पहले
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आेज ने आत्महत्या क्यों की? इस सवाल पर उनकी मां बीना आैर प|ी प्रीति उर्फ रिंकी फिलहाल कुछ कहने की स्थित में नहीं हैं। पुलिस उनके बोलने का इंतजार कर रही है। लेकिन घटना के बाद मौके पर पहुंचे लोगों ने प|ी रिंकी के मुंह से एक बात जरूर सुनी- मैं कहती थी कि कहीं कुछ ऐसा-वैसा न हो जाए। लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद वह बेहोश हो गई। अब उसने जो कहा, उसमें एेसा आैर वैसा का क्या मतलब है। आैर उसे किसने नहीं सुना? इन दो सवालों में पूरे मामले की गुत्थी उलझी है। टीआई दामोदर गुप्ता के मुताबिक परिजन अभी कुछ बोलने की स्थित में नहीं हैं। हालांकि रिंकी आेज के अंतिम संस्कार की क्रिया में शामिल हुई थी।

कारोबारी ने की आत्महत्या

काराेबारी की मौत के बाद विलाप करती प|ी को समझाते पड़ौसी।

वह डिप्रेशन में थे, घर में कोई परेशानी नहीं थी: ओज के दादा जेएम आनंद के जूनियर रहे एडवोकेट राकेश शर्मा का कहना है कि श्री आनंद के घर में 43 साल से उनका आना-जाना था। परिवार में ऐसी कोई परेशानी नहीं थी जिसकी वजह से ओज ऐसा आत्मघाती कदम उठाते। वह डिप्रेशन में थे और डिप्रेशन एक मानसिक अवस्था है।

दूसरे कमरे में रहती थी बंदूक

आत्महत्या में इस्तेमाल की गई बंदूक मां के कमरे के बगल में अलमारी में रखी रहती थी। रात में आेज खुद अलमारी से निकालकर उसे अपने कमरे में लाए थे। इसके बाद भी किसी ने इस पर गौर नहीं किया। आत्महत्या के लिए भी उन्होंने बेडरूम व बाथरूम के बीच बने ड्रेसिंग रूम को चुना।

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