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मप्र से आलू का बीज खरीदकर उप्र कर रहा देश में सबसे ज्यादा उत्पादन

3 वर्ष पहले
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रामकृष्ण उपाध्याय | ग्वालियर

आपको भले ही यकीन न हो, लेकिन देश का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश हमारे यहां के आलू का सबसे बड़ा खरीदार है। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्वालियर की मिट्‌टी गुणवत्ता वाले आलू के उत्पादन के लिए सबसे मुफीद है। इसीलिए यहां केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया। जानकारों के अनुसार यूपी के किसान अनुसंधान केंद्र में पैदा किए जा रहे गुणवत्ता और स्वाद से पूर्ण आलू के बीज से बंपर उत्पादन लेकर शुगर फ्री आलू के रूप में ब्रांडिंग कर बेच रहे हैं। इस साल यूपी सरकार ने केंद्र से 850 क्विंटल आलू का बीज खरीदा है।

7 किस्मों के बीज का हो रहा उत्पादन

आलू अनुसंधान केंद्र के 172 हेक्टेयर के फार्म हाउस में सात किस्म के आलू के बीज का उत्पादन किया जा रहा है। इसमें कुफरी चंद्रमुखी, लवकार, ज्योति, सिंदूरी, सूर्या, चिप्सोना-1 और चिप्सोना-3 हैं। केंद्र में बीज उत्पादन के लिए दो और नई किस्म लाई गईं हैं। इसमें हिमालिनी का उत्पादन वर्ष 2019 और मोहन का वर्ष 2020 तक आने की संभावना है।

आलू के बारे में वह सब जानकारी, जो आप जानना चाहते हैं

केंद्र में बीज के लिए दो नई किस्मेें और आईं हैं।

मालवांचल में जा रहा 70 फीसदी आलू का बीज: मप्र में मालवांचल आलू का सबसे बड़ा उत्पादक इलाका है। आलू अनुसंधान केंद्र से प्रदेश में लिए जा रहे कुल आलू के बीज का 70 फीसदी मालवांचल में बोया जा रहा है।

दूध की तरह संपूर्ण आहार है आलू

उद्यानिकी विभाग के एचओडी डॉ. राजेश लेखी के अनुसार आलू, दूध की तरह संपूर्ण आहार है क्योंकि 100 ग्राम आलू में 94 कैलोरी, 20.13 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 1.8 ग्राम फाइबर, 0.1 ग्राम फैट, 1.87 ग्राम प्रोटीन, 13 मिलीग्राम विटामिन सी, 0.106 मिलीग्राम आयरन, 44 मिलीग्राम फास्फोरस, 379 मिलीग्राम पोटेशियम, 5 मिलीग्राम कैल्शियम, 0.02 मिलीग्राम राइबोफ्लेविन 0.106 मिलीग्राम थाइमिन, 1.44 मिलीग्राम नियामिन और 0.211 मिलीग्राम विटामिन बी-6 होती है।

विश्व में सालाना उत्पादन

40 करोड़ मीट्रिक टन

भारत में हर साल खपत करीब 3 करोड़ 40 लाख 17 हजार क्विंटल

चिप्सोना की मांग सबसे ज्यादा

यूपी से सूर्या, चिप्सोना-1 की डिमांड अधिक आई है। सूर्या जहां हीट टोलरेंट के साथ कम शक्कर वाली वैराइटी मानी जाती है। चिप्सोना-1, चिप्स बनाने में उपयोग होता है। इसलिए उत्पादकों द्वारा दोनों वैराइटी को अधिक पसंद किया जा रहा है। -डॉ. सत्यजीत रॉय, अध्यक्ष आलू अनुसंधान केंद्र ग्वालियर

एक क्विंटल से 4 साल बाद पैदा होता है 1800 क्विंटल आलू

आलू अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी वायपी सिंह ने बताया कि केंद्र पर प्रजनक बीज तैयार किया जाता है। सीड प्रोटोकॉल के अनुसार पहली साल फाउंडेशन- वन में यदि एक क्विंटल आलू लगाया जाता है तो उससे छह गुना यानी छह क्विंटल आलू का उत्पादन ले सकते हैं। दूसरे साल फाउंडेशन-टू में छह क्विंटल से पांच गुना यानी 30 क्विंटल और तीसरे साल सर्टिफाइड स्टेज में 30 क्विंटल से छह गुना यानी 180 क्विंटल आलू का बीज तैयार होता है। चौथे साल 180 क्विंटल आलू से दस गुना यानी 1800 क्विंटल तक पैदावार ली जा सकती है।

भारत में सालाना उत्पादन

वर्ष 2016-17 में 486 लाख टन आलू पैदा हुआ था। 2017-18 में 493 लाख टन (4 करोड़ 93 लाख क्विंटल) आलू उत्पादन का अनुमान है।

यूपी से आलू के बीज की सबसे अधिक डिमांड

राज्य 2017-18 2016-17

उत्तरप्रदेश 850 801

मध्यप्रदेश 675 578

प.बंगाल 610 208

छत्तीसगढ़ 480 367

नोट: आलू का वजन क्विंटल में

भारत के 5 प्रमुख राज्यों में आलू का उत्पादन

उत्तरप्रदेश: 155 लाख टन

पश्चिम बंगाल: 92 लाख टन

बिहार: 73 लाख टन

गुजरात: 39 लाख टन

मध्यप्रदेश: 21 लाख टन

यहां जाता है ग्वालियर का आलू: केंद्र से मप्र के मालवांचल, उप्र, पश्चिम बंगाल, छग, पंजाब, उड़ीसा, गुजरात, उत्तराखंड, नाबार्ड व एनएचआरडीएफ के लिए आलू जाता है।

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