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जांच में घूम रही आईजी की झूठी रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने पूछा- सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की

3 वर्ष पहले
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प्रशासनिक रिपोर्टर| ग्वालियर

मप्र किसान कांग्रेस कमेटी के नेता विनय सिंह उर्फ मनिया हत्याकांड में पीएचक्यू शिकायत शाखा के तत्कालीन आईजी आरएस कौल की फर्जी जांच रिपोर्ट पिछले साल से टेबल-टेबल घूम रही है। विभाग ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि, पीएचक्यू के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश कर श्री कौल की जांच रिपोर्ट को गलत व फर्जी बता चुके हैं। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने राज्य सरकार से पूछा है कि श्री कौल पर अब तक क्या कार्रवाई की? पीएचक्यू ने हाईकोर्ट में बताया है कि श्री कौल से इस जांच रिपोर्ट के संबंध में 4 बिंदुओं पर जवाब लिया गया है, जिसकी जांच चल रही है। इस पर हाईकोर्ट ने इस जांच की जानकारी भी पेश करने के निर्देश दिए हैं।

डीजी: नहीं है शिकायत का रिकॉर्ड, हाईकोर्ट: रिकाॅर्ड देंं

पुलिस हेड क्वार्टर में शिकायत विभाग के विशेष महानिदेशक केएन तिवारी ने बीते महीने रिपोर्ट पेश कर हाईकोर्ट को बताया था कि शिकायत शाखा में आरोपी अरविंद यादव द्वारा जांच संबंधी दिया गया कोई भी आवेदन रिकाॅर्ड में नहीं है। इसके साथ ही ऐसी कोई फाइल भी तैयार नहीं की गई है, जिससे प्रकरण की जांच व आदेश के साथ रिपोर्ट की जानकारी मिल सके। उन्हें इस मामले में सिर्फ कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह कौरव, मितेंद्र सिंह, पंकज शर्मा, गौरव मिश्रा समेत 17 गवाहों के बयान की कॉपी मिली है। जिनकी जांच चल रही है। वहीं हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि इस केस की जांच से संबंधित सभी दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश किए जाएं।

भास्कर ने किया था खुलासा

6-7 अप्रैल 2017 की दरमियानी रात विनय सिंह की हत्या हुई और 7 अप्रैल को मेहरा टोल प्लाजा के पास कार में अधजली लाश मिली थी। इस मामले में आरएस कौल ने 19 मई 2017 को जांच रिपोर्ट देकर अरविंद यादव को निर्दोष बताया था। दैनिक भास्कर ने इस रिपोर्ट को बिंदुवार बताया था कि, किस प्रकार भोपाल में बैठकर आरएस कौल द्वारा फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार की गई। जिसमें श्री कौल ने न सिर्फ अरविंद को निर्दोष बताया, बल्कि उसकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने श्री कौल की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और इस रिपोर्ट की जांच कर पीएचक्यू ने भी इसे फर्जी ठहराया।

पीएचक्यू ने मांगा इन सवालों का जवाब

इस प्रकरण की जांच क्यों और किस आधार पर की?

क्या आवेदक की कोई शिकायत आपको मिली थी? यदि हां, तो किससे।

आपके द्वारा इस शिकायत को नस्ती पर व्यवहरित क्यों नहीं किया गया?

जो निर्देश जारी किए, वो ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस पुलिस अधीक्षक या उप पुलिस महानिरीक्षक/ पुलिस महानिरीक्षक को क्यों नहीं दिए गए? सीधे थाना प्रभारी को निर्देश पत्र जारी करने का क्या कारण था?

हाईकोर्ट ने खड़े किए यह सवाल

जब ग्वालियर में आईजी, एसपी व अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की व्यवस्था है तो आरोपी ने भोपाल स्थित पुलिस हेड क्वार्टर में सीधे जांच का आवेदन क्यों दिया?

आरोपी अरविंद यादव की तरफ से स्थानीय पुलिस अधिकारियों को जांच के लिए कोई आवेदन दिया गया था या नहीं?

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