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सोमवती अमावस्या आज, पंचोपचार से होगा सोमेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन

3 वर्ष पहले
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सोमवती अमावस्या 16 अप्रैल को मनाई जाएगी। स्कंद पुराण के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन शिव मंदिर में जाकर भगवान शंकर का पंचोपचार पूजन कर सोमेश्वर महादेव का ध्यान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान, तीर्थों में स्नान, जप, हवन, ब्राह्मण भोजन और पितृ तर्पण से वंश वृद्धि एवं सुख समृद्धि मिलती है।

ज्योतिषाचार्य पं. विजयभूषण वेदार्थी ने बताया कि मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार सोमवती अमावस्या को पुष्कर योग की उपमा दी गई है। इस दिन किए गए दान, मंत्र जाप का फल हजारों गौ दान के बराबर मिलता है। संवत 2075 में दो सोमवती अमावस्या और दो भोमवती अमावस्या एवं दो शनिश्चरी अमावस्या का योग बन रहा है। प्रथम सोमवती अमावस्या 16 अप्रैल को दूसरी सोमवती अमावस्या 4 फरवरी 2019 को होगी।

उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल सुबह 8.12 बजे वृष लग्न में जगत लग्न का उदय हो गया। जगत लग्न लगने से ग्वालियर का मानसून सामान्य रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. विजयभूषण वेदार्थी के अनुसार जब सूर्य निरयण मेष राशि में प्रवेश करते हैं उस समय तात्कालिक लग्न को जगत लग्न कहते हैं। इस वर्ष 14 अप्रैल को सुबह 8.12 बजे उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, ऐंद्र योग एवं मीन राशि चंद्र के समय सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर गए। वृष लग्न में जगत लग्न का उदय हुआ है। लग्नेश शुक्र उच्चस्थ सूर्य के द्वादश स्थान में गुरु से दृष्ट हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में जलवायु एवं कृषि क्षेत्र के लिए सामान्य मानसून रहेगा। इससे महंगाई में वृद्धि होगी। जल से संबंधित समस्याअों का सामना भी करना पड़ सकता है।

18 अप्रैल को शनि होंगे वक्री

ज्योतिर्विद डॉ.एचसी जैन के अनुसार सूर्य पुत्र शनि 18 अप्रैल को सुबह 7.17 बजे वक्री हो जाएंगे। इस बार शनि अक्षय तृतीया यानी परशुराम जयंती के दिन वक्री हो रहे हैं। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त की श्रेणी माना जाता है। इस शुभ दिन इस वर्ष के मंत्री शनि का वक्री होना शनि प्रधान व्यक्तियों के लिए विशेष शुभ प्रद रहेगा, लेकिन जिन जातकों की राशि में शनि अशुभ प्रभाव में हैं उस अशुभता में वृद्धि भी अधिक रहेगी। शनि का धनु राशि में वक्रत्व काल 6 सितंबर तक रहेगा।

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