अपनी ही खूबियों के कातिल हैं...
ग्वालियर | अपनी ही खूबियों के कातिल हैं, जो किसी का भला नहीं करते, दिल से निकले दुआ तो पूरी हो, लोग दिल से दुआ नहीं करते। कुछ इन्हीं पंक्तियों के साथ डॉ. कमल ग्वालियरी ने मानस भवन में काव्य गोष्ठी की शुरुआत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. रामअवतार सिंह रहे। अध्यक्षता चेतराम सिंह भदौरिया ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि नईम कुर्रेशी थे।
राह उल्फत की तो मजबूत बना दी जाए, हो जो नफरत की वो दीवार हटा दी जाए, साजिशें हों जो हमें बांटने वाली यारो, उन सभी साजिशों में आग लगा दी जाए।
- अमित चितवन
अंधेरों से निकलो, उजालों में जाओ, अंधेरों की सच्चाई तो बताओ। - डॉ. राकेश राज भटनागर
चार किताबें पढ़कर ही दुनिया को पढ़ पाना मुश्किल, फिर भी प्यार मोहब्बत से जीना है आसान।
- नईम कुरैशी