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स्वच्छता पर 20 करोड़ खर्च फिर भी देश के साफ 51 शहरों की पहली सूची से ग्वालियर गायब

3 वर्ष पहले
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पिछले एक साल में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग बढ़ाने के नाम पर 20 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करने के बाद भी ग्वालियर देश के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में जगह नहीं बना सका है। केन्द्र सरकार ने बुधवार को विभिन्न श्रेणी में 51 शहरों की सूची जारी की है। उसकी टॉप-3 की सूची में पहले स्थान पर इंदौर, दूसरे पर भोपाल और तीसरे पर चंडीगढ़ ने जगह बनाई है। देश में 10 लाख की आबादी वाले शहरों की पांच श्रेणी में भी ग्वालियर का नाम नहीं है। अब नगर निगम आयुक्त विनोद शर्मा को उम्मीद है कि 20 मई को जारी होने वाली शेष शहरों की सूची में 27 वें पायदान से ऊपर ही रहेंगे।

स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 का सर्वे करने के लिए दिल्ली से 12 फरवरी को टीम आई थी। 12 दिन रहकर टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में जाकर सर्वे किया। उसके बाद आंकड़ों के साथ दिल्ली रवाना हो गई थी। तब उम्मीद जताई जा रही थी कि टॉप टेन की सूची में ग्वालियर स्थान बना लेगा। सर्वे सूची जारी होने के बाद ऐसा हो नहीं पाया। जबकि ऑनलाइन फीडबैक में ग्वालियर पहले नंबर पर आया था। ओडीएफ फ्री शहर पहले ही हो चुका है।

10 लाख से ऊपर की आबादी की टॉप 5 कैटेगरी में भी पिछड़ा ग्वालियर

सचिन तेंदुलकर मार्ग। 10 फरवरी को जब राज्यपाल यहां आई थीं तब यह चकाचक था। लेकिन अब यहां गंदगी फैली हुई है।

30 से 27 में आए, अब इंतजार ऊपर आने का

साल 2016 में सिर्फ 73 शहरों को शामिल कर स्वच्छता सर्वेक्षण कराया गया था। उस वक्त ग्वालियर 30वें नंबर पर रहा था।

साल 2017 में 434 सिटी को शामिल कर सर्वेक्षण हुआ। इस बार 30वीं पायदान से 27 नंबर पर शहर आ गया।

साल 2018 में 4041 शहरों को शामिल कर सर्वेक्षण कार्य किया गया। अब उम्मीद टॉप 10 की थी, लेकिन संभावना खत्म हो गई।

ये आए 10 लाख की आबादी में ऊपर

कैटेगरी शहर

क्लीननेस बिग सिटी विजयवाड़ा

फास्टेड मूवर बिग सिटी गाजियाबाद

बेस्ट सिटी इन सिटीजन फीडबैक कोटा

बेस्ट सिटी इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिस नागपुर

बेस्ट सिटी इन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नवी मुंबई

यहां पहले पिछड़े, पर सबक नहीं लिया

लैंडफिल साइट: 2 साल में साइट नहीं बनी।

एसटीपी प्लांट : अभी तक 50 एमएलडी की क्षमता वाला ही प्लांट है, जो पर्याप्त नहीं था। अब 144 एमएलडी की क्षमता वाला बन रहा है।

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन: शहर में अभी तक पूरी तरह डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू नहीं हुआ है। अब 1 प्राइवेट कंपनी ईको ग्रीन को काम दिया गया है।

मशीन: इंदौर और भोपाल की तरह अत्याधुनिक मशीन सड़क और सीवर सफाई की नहीं है।

मैन पॉवर: नगर निगम ग्वालियर का एरिया प्रदेश में सबसे बड़ा एरिया है। उस हिसाब से मैन पाॅवर की व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई।

टॉप 10 की उम्मीद थी

स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर और निगम के अमले ने जिस तरह सहयोग देकर काम किया। उस हिसाब से टॉप-10 की सूची में नाम होना चाहिए था। अब ओवर ऑल में 27वें स्थान से ऊपर जरूर आएंगे। विनोद शर्मा, आयुक्त नगर निगम

करोड़ों रुपए बेकार गए

स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर नगर निगम ने 20 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर दी है। तब भी हम पुरानी स्थिति में नहीं हैं। अब ओवर ऑल की बात कही जा रही है। वह तस्वीर भी सामने आ जाएगी। शहर में चारों तरफ कचरा आज भी दिख जाएगा। कृष्णराव दीक्षित, नेता प्रतिपक्ष

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