नियम: जेल रिकॉर्ड से ही माने जाएंगे मीसाबंदी, मंत्री बोले-सिफारिश भी चलेगी
प्रशासनिक रिपोर्टर | ग्वालियर
आपातकाल के दौरान जेल में राजनीतिक व सामाजिक कारणों से बंद रहने वाले मीसा बंदियों के मामले में प्रदेश के किसान कल्याण मंत्री गौरीशंकर बिसेन की राय सरकार के नियम से उलट है। सरकार ने 2 मीसा बंदियों की अनुशंसा के आधार की जगह सिर्फ जेल रिकॉर्ड वाले बंदियों को मीसाबंदी मानने के आदेश दिए हैं। जबकि प्रभारी मंत्री बिसेन का कहना है कि उस वक्त कई जेलों का रिकॉर्ड गायब हो गया था जो अब तक नहीं मिल रहा। इसलिए अनुशंसा के आधार पर भी मीसा बंदी का दर्जा दिया जा सकता है। श्री बिसेन ने यह बात ग्वालियर प्रवास के दौरान बुधवार को मुरार सर्किट हाउस पर मिलने पहुंचे उन आवेदकों से कही जिनके आवेदन लंबित हैं। आवेदकों ने बताया कि सरकार ने अनुशंसा का नियम 25 सितंबर 2017 को खत्म किया है। लेकिन हम लोगों के आवेदन उससे पहले के लंबित हैं। लेकिन स्थानीय अफसर उनका निराकरण नहीं कर रहे। ग्वालियर में मीसाबंदी के लिए 248 आवेदन लंबित हैं।
सरकार का आदेश: मप्र सरकार ने मीसा बंदियों के संबंध में 25 सितंबर 2017 को नया आदेश जारी कर कहा कि आपातकाल के दौरान जो लोग राजनीतिक या सामाजिक कारण से एक माह या उससे अधिक समय तक जेल में बंदी रहे। उन लोगों का जेल रिकॉर्ड देख मीसाबंदी की पात्रता दी जाएगी। पहले किन्हीं दो मीसाबंदियों की अनुशंसा के आधार पर ही लोगों को मीसाबंदी मान लिया जाता था।