प्रभु का अनुभव करना है तो मंदिर जाना ही होगा:विशोक
विनय नगर स्थित त्रिशलागिरी में भगवान महावीर का अभिषेक करते मुनिश्री।
सिटी रिपोर्टर। ग्वालियर
यदि आपको ईश्वर का अनुभव करना है तो आपको मंदिर जाना होगा। किसी का साथ ये सोचकर मत छोड़ना कि उसके पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है। बस ये सोचकर साथ निभाना कि उसके पास कुछ नहीं है, सिवाय तुम्हारे खोने के। यह विचार मुनिश्री विशोक सागर महाराज ने शुक्रवार को विनय नगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि लोग कहते हैं मंदिर क्यों जाएं। ईश्वर तो सर्वत्र हैं। घर में ही ईश्वर के दर्शन कर लेंगे। उन्होंने कहा कि हवा भी सर्वत्र है। इसके बाद भी घर में खिड़की, दरवाजे, कूलर, पंखे इसलिए होते हैं ताकि हम हवा खा सकें। वैसे ही ईश्वर का अनुभव करने के लिए मंदिर जाना होगा। जिस स्थान पर सर्प होता है हम वहां सजग रहते है। वैसे ही हमारे मन में पाप रूपी सर्प है, इससे सजग रहकर ईश्वर की भक्ति में मन लगाकर पाप से बचा जा सकता है। मुनिश्री ने कहा कि जीवन को श्रीराम के समान बनाना चाहिए। प्रभु राम ने वन में रहकर भी धर्म को नहीं छोड़ा। वे सदाचार के साथ 14 साल तक वन में रहे।
गोपाचल पर्वत की वंदना करेगे आज : मुनिश्री शनिवार सुबह 6 बजे फूलबाग पर स्थित जैन तीर्थ गोपाचल पर्वत पर विराजे 42 फुट ऊंचे पद्मसन भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के दर्शन करेंगे। मुनिश्री के मंगल प्रवचन 9 बजे से होंगे। दोपहर 2.30 बजे से तत्वासूत्र शंका समाधान का वाचन और शाम 6.30 बजे गुरु भक्ति आनंद यात्रा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।