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ईश्वर की प्राप्ति परीक्षा से नहीं प्रतीक्षा से होती है: गुंजन

3 वर्ष पहले
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राजा बाक्षर मंदिर में भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।

सिटी रिपोर्टर|ग्वालियर

भागवत कोई किताब नहीं वरन मुक्ति का अमर ग्रंथ है। भागवत पिता और भक्ति मां का स्वरूप है। भागवत रूपी गंगा भगवान के श्रीमुख से निकली है। ईश्वर परीक्षा से नहीं प्रतीक्षा से मिलते हैं। जैसे शबरी को लंबी प्रतीक्षा के बाद भगवान राम के दर्शन हुए थे। यह बात सुश्री गुंजन वशिष्ठ ने शुक्रवार को राजा बाक्षर मंदिर में चल रही भागवत कथा में कही।उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी विपत्ति का समय तब होता है जब वह भक्ति से दूर हो जाता है।भक्ति मुक्ति का मार्ग है। इसलिए इसका सदैव अनुकरण करना चाहिए। ईश्वर को भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है। अन्य माध्यमों से भगवान को प्राप्त करने में अभिमान होने की संभावना रहती है, लेकिन सच्ची भक्ति में अभिमान नहीं होता है।

राजा बाक्षर मंदिर में भागवत कथा

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