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  • ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों काे मिलेगी राहत, अब 5 के बजाय 3 सप्ताह की रेडियोथैरेपी, रेडिएशन का दुष्प्रभाव भी होगा कम

ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों काे मिलेगी राहत, अब 5 के बजाय 3 सप्ताह की रेडियोथैरेपी, रेडिएशन का दुष्प्रभाव भी होगा कम

3 वर्ष पहले
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ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को अब रेडियोथैरेपी के लिए 5 सप्ताह का कोर्स नहीं लेना होगा। जेएएच के कैंसर विभाग ने नई पद्धति हाइपोफ्रेक्सिनेटेट रेडियोथैरेपी इन ब्रेस्ट कैंसर से इलाज शुरू किया है। इस पद्धति में रोगियों को सिर्फ 3 सप्ताह की रेडियोथैरेपी दी जाती है। इसका लाभ यह है कि मरीज को कम समय में कम रेडिएशन से जल्दी लाभ मिल जाता है। जेएएच के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.संजय चंदेल की मानें तो प्रदेश में सबसे पहले इस पद्धति का इलाज जेएएच में शुरू हुआ है।

ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों को आमतौर पर 5 सप्ताह की रेडियोथैरेपी दी जाती है। रेडियोथैरेपी में लगने वाले समय और लंबा इलाज होने के कारण कई रोगी तो बीच में ही इलाज या तो बंद कर देते हैं या फिर कुछ दिन आने के बाद रेडियोथैरेपी के लिए आते ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, जो मरीज 5 सप्ताह की रेडियोथैरेपी कराते थे उनमें कॉस्मेटिक इफैक्ट दिखने लगता था। ऐसे रोगियों की त्वचा सख्त हो जाती है यानी फाइब्रोसिस टैलेजेक्टिसिया कम हो जाती है। हाइपोफ्रेक्सिनेटेट रेडियोथैरेपी इन ब्रेस्ट कैंसर पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कॉस्मेटिक इफैक्ट अच्छा रहने के साथ ही रेडिएशन भी कम होता है। इस पद्धति से अभी तक 66 मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है।

ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों को आमतौर पर 5 सप्ताह की दी जाती है रेडियोथैरेपी

हाइपोफ्रेक्सिनेटेट रेडियोथैरेपी इन ब्रेस्ट कैंसर पद्धति से प्रदेश में सबसे पहले जेएएच में मरीजों का इलाज शुरू

प्रदेश में पहली बार इस पद्धति से इलाज हुआ है शुरू

हाइपोफ्रेक्सिनेटेट रेडियोथैरेपी इन ब्रेस्ट कैंसर पद्धति से अभी तक सिर्फ स्टार्ट बी ट्रायल यूके में रिसर्च हो चुकी है। प्रदेश में सबसे पहले उन्होंने इस पद्धति से इलाज शुरू किया है। उनकी रिसर्च जनरल ऑफ कैंसर रिसर्च इन थिरेप्यूटिक्स (जेसीआरटी) में प्रकाशित हुई है। जल्द ही वे इस पद्धति से मरीजों की स्टडी की रिसर्च भी जनरल में प्रकाशित कराएंगे। डॉ. संजय चंदेल, एसोसिएट प्रोफेसर जीआरएमसी एवं एक्सपर्ट अंकोलॉजिस्ट डीजीएचएस मिनिस्ट्री आॅफ हेल्थ एंड फेमिली वेलफेयर

नई पद्धति में साइड इफेक्ट के चांस कम

डॉ. संजय चंदेल का कहना है कि पुरानी पद्धति में मरीज को 50 ग्रे क्षमता की रेडियोथैरेपी देना पड़ती थी, लेकिन नई पद्धति में सिर्फ 40 ग्रे (रेडिएशन नापने की इकाई) रेडियोथैरेपी देनी पड़ती है। इस कारण इसके साइड इफेक्ट बहुत कम रहते हैं।

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