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बेटी की होना थी लगुन, रिश्तेदार खा रहे थे खाना, सिलेंडर फटा, 15 झुलसे

3 वर्ष पहले
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घाटीगांव क्षेत्र स्थित सिमरिया टांका में शु्क्रवार दोपहर एलपीजी का छोटा सिलेंडर फटने से एक ही घर के 15 लोग झुलस गए और घर में आग लग गई। जिस घर में यह हादसा हुआ वहां शादी की तैयारियां चल रही थी। शुक्रवार शाम को ही बेटी की लगुन जानी थी। दोपहर में लगुन लिखे जाने के बाद पूरा परिवार और रिश्तेदार आंगन में बैठकर खाना खा रहे थे। तभी अचानक आग लगी और सिलेंडर फट गया। हादसे का कारण सिलेंडर से गैस लीक होना बताई जा रही है। आग लगने से झुलसे बीएसएफ जवान सहित 4 लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। इन लोगों का शरीर 60 प्रतिशत से अधिक जल गया है।

सिमरिया टांका निवासी छोटेलाल जाटव की बेटी ललिता की 18 अप्रैल की शादी है। शादी एसएएफ की 13वीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक हरिओम निवासी ग्राम पाटई से तय हुई है। ललिता का बड़ा भाई विनोद बीएसएफ में सिपाही है। उसकी पोस्टिंग जम्मू में है। बहन की शादी में शामिल होने के लिए वह भी ग्वालियर आया था। शुक्रवार को ललिता की लगुन जानी थी। दोपहर करीब 12 बजे लगुन लिखी गई। इसके बाद रिश्तेदार व परिजन आंगन में खाना खाने बैठ गए। आंगन के पास ही बने एक कमरे में ललिता की भाभी लाली खाना बना रही थीं। आंगन में चार सिलेंडर रखे थे। एक छोटा(5 किग्रा) और तीन घरेलू उपयोग वाले बड़े एलपीजी सिलेंडर भरे हुए रखे थे। दोपहर करीब 12.30 बजे सभी लोग खाना खा रहे थे। तभी अचानक सिलेंडर से तेज आवाज आई और धमाके के साथ छोटा सिलेंडर फट गया। सिलेंडर फटने से आंगन और एक कमरे में आग लग गई। सिलेंडर के दो टुकड़े हो गए। जहां-जहां गैस पहुंची, वहां-वहां आग लग गई। इस हादसे में 15 लोग झुलस गए। आग लगते ही चीख पुकार मची तो आसपास के लोग दौड़े। पानी फेंककर आग बुझाई और इसके बाद गांव के सरपंच मदन कुशवाह और अन्य लोग अपनी गाड़ियों से ही झुलसे लोगों को ग्वालियर के जेएएच लेकर आए। बर्न यूनिट में भर्ती हैं। घटना के बाद पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में गैस लीक होना ही आग का कारण सामने आ रहा है।

ललिता खुद फेंकने लगी पानी तो बुझ गई आग

18 अप्रैल को जिस ललिता की शादी थी, वह लगुन के बाद घर की दूसरी मंजिल पर कमरे में पहुंच गई। अचानक धमाका हुआ और चीख पुकार मच गई। आवाज सुनकर वह खुद दौड़ी और कमरे में रखा पानी फेंकने लगी। तब तक पड़ोसी भी आ गए और फिर पानी फेंकना शुरू कर दिया। इसके चलते जल्द ही आग पर काबू पा लिया गया।

अस्पताल में इलाज के लिए जाते घायल।

यह लोग झुलसे
छोटेलाल (60), किशनलाल (65) साहब सिंह(30), विनोद(38),संतोष (18), गोमती (25), अंकित (18) संदीप(17),कान्हा(4),मन्नत (6),तमन्ना (7), सविता(22),देवकुमार (48), अजय गर्ग(45) ,यशवंत जाटव(40) झुलसे हैं।

मदद को नहीं आया स्टाफ चादर नहीं दिया
झुलसे लोगों को अस्पताल ले जाने के लिए पहले तो ग्रामीणों ने एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन एक घंटे तक जब एंबुलेंस नहीं आई तो खुद ही लोगों को लेकर आए। न ही यहां स्ट्रेचर मिला। पार्क के पास रखे स्ट्रेचर को जब सरपंच मदन कुशवाह ले आए तो वह धूप के कारण बहुत गर्म हो गया था। वार्ड वॉय से उन्होंने चादर मांगा, क्योंकि आग में झुलसी गोमती चल भी नहीं पा रही थी। चादर भी स्टाफ ने नहीं दिया। इसके बाद सरपंच ने गाड़ी से अखबार निकालकर स्ट्रेचर पर बिछाया। फिर गोमती को बर्न यूनिट तक ले गए।

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