एक्सीडेंट के कारण 30 दिन आईसीयू में रहा फिर तैयारी की, सीजे में हुआ चयन
पिता एडीजे हैं इसलिए मैंने स्कूल लाइफ में ही सिविल जज की तैयारी का मन बना लिया था। डबरा से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2008 में जीवाजी यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में दाखिला लिया। 2013 में लॉ पूरी करने के बाद एलएलएम करने नोएडा चला गया। यहां से ग्वालियर आया और सिविल जज की तैयारी शुरू कर दी। बात 2014 की है, जब मैं दौलतगंज से रात 11 बजे घर लौट रहा था। तभी मुझे ट्रक ने टक्कर मार दी। इसके बाद 30 दिन तक आईसीयू में रहा और 6 महीने में पूरी तरह से ठीक हो सका। इसके बाद प|ी और दोस्तों ने मुझे सिविल जज की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया। लगातार दो अटेंप्ट में असफल होने के बाद भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कमियों को ठीक किया। यही वजह रही कि तीसरे अटेंप्ट में मेरा सेलेक्शन हो सका। यह कहना है सिविल जज बने उमेश भगवती का। गुरुवार को मप्र हाईकोर्ट ने सिविल जज क्लास-2 का परिणाम जारी कर दिया है। महेश के पिता रमेश भगवती एडीजे हैं जो श्योपुर में पदस्थ हैं।
Civil Judge Result
उमेश भगवती