ग्वालियर| वक्ता के मन में यदि सांसारिक वस्तुओं का लालच होगा तो वह समाज को सही दिशा नहीं दे सकता। भागवत सुनने के बाद मनुष्य के व्यवहार में परिवर्तन भी आना आवश्यक है। नहीं तो श्रीमद् भागवत कथा सुनने का कोई अर्थ नहीं। यह बात लक्ष्मीगंज में स्थित रामद्वारा में पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत चल रही भागवत कथा के पहले दिन पुष्कर से आए संत अमृतराम महाराज व्यक्त किए।