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गंदगी फैलाने से रोका, नहीं माने तो स्वच्छता संदेश की तख्तियां लेकर पार्क में पहुंचीं महिलाएं, भागे पुरुष

3 वर्ष पहले
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कंपू में स्थित पार्क में घूमने आने वाले पुरुष रोज जगह-जगह गंदगी फैलाते थे। इससे वहां आने वाली महिलाएं परेशान थीं। उन्होंने गंदगी फैलाने वाले पुरुषों को समझाने का प्रयास भी किया। लेकिन वे नहीं माने तो शनिवार की सुबह महिलाएं हाथ में स्वच्छता का संदेश देने वाली तख्तियां लेकर पार्क में पहुंच गईं और उन लोगों को दिखाने लगीं जो वहां गंदगी करते थे। महिलाआें के इस कदम से पार्क में गंदगी फैलाने वाले शर्म के कारण भागते बने ।

दरअसल शुक्रवार को अपनी परिचित के साथ घूमने गईं संध्या त्रिपाठी ने पार्क के कोने में गंदगी फैला रहे एक व्यक्ति को टोका तो उसने अपने कुछ साथियों को बुलाकर महिलाआें के साथ अभद्र व्यवहार भी किया आैर मजाक भी उड़ाया। उस वक्त तो दोनों महिलाएं वहां से चुपचाप चली आईं लेकिन उन्होंने उन लोगों को सबक सिखाने की ठान ली।

सुबह-सुबह तख्तियां लेकर पहुंचीं महिलाएं: गंदगी फैलाने वालों को सबक सिखाने के लिए शनिवार सुबह 6 बजे संस्कार मंजरी संस्था की शरद आहूजा, संध्या त्रिपाठी, नीलम गुप्ता, मिथलेश शर्मा, किरण वाजपेयी, गीतांजलि गीत, हरप्रीत कौर, मनीषा शर्मा, मनीषा चतुर्वेदी, माला आनंद, मोनिका त्रिवेदी पार्क पहुंच गईं। इन महिलाआें ने तख्तियां उन लोगों को दिखाना शुरू कर दीं जो पार्क में गंदगी फैलाते थे। यह देख गंदगी फैलाने वाले मौके से खिसक लिए तो महिलाएं भी अपने हाथों की तख्तियाें को पार्क में जगह-जगह लगाकर चली गईं।

नेहरू पार्क में स्वच्छता संदेश की तख्तियां लेकर प्रदर्शन करती महिलाएं। फोटो: भास्कर

पार्क में आकर गंदगी फैलाने वाले लोग काफी पढ़े लिखे हैं। इनके द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी के कारण जगह-जगह बदबू आती है। गंदगी में बच्चों की बॉल चली जाती है। शुक्रवार को जब इनका विरोध किया तो ये अभद्रता पर उतारू हो गए। इसके चलते शनिवार को महिलाओं को साथ लेकर उन लोगों को सबक सिखाने की ठानी थी। हम लोगों को देखते ही वे लोग मौके से भाग गए। संध्या त्रिपाठी, अध्यक्ष, संस्कार मंजरी

स्वच्छता का महत्व सभी को समझना चाहिए। पार्क जैसी सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम गंदगी फैलाना बहुत ही शर्म की बात है। सार्वजनिक पार्क में गंदगी ऐसी उम्र के लोग फैला रहे थे, जिन्हें खुद लोगों को स्वच्छता का संदेश देना चाहिए। हमारे द्वारा किए गए प्रदर्शन में हमारे साथ छोटे-छोटे बच्चे भी आगे आ गए। उन लोगों को शर्म आना चाहिए। गीतांजलि गीत

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