हाईकोर्ट ने सहकारिता विभाग में अंकेक्षक के पद पर कार्यरत आरएल जाटव को राहत देने से मना कर दिया। जस्टिस शील नागू व जस्टिस एसए धर्माधिकारी की डबल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि किसी मामले में निर्णय पारित करते समय यदि कोर्ट को ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अपराधी छूट रहा है तो उस स्थिति में साक्ष्य के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ईओडब्ल्यू को प्राथमिकी दर्ज कर चार माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का जो आदेश दिया है, उसमें भी किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के अभियोजन को स्वीकृति देने के आदेश को अनुचित ठहराया।
ईओडब्ल्यू के विशेष अभियोजक सुशील चतुर्वेदी ने बताया कि सहकारिता विभाग में हुए घोटाले में रमा सहकारी समिति के अध्यक्ष रामदयाल शाक्य व सहकारिता विभाग के सहायक संचालक एससी वोकाटे को 30 जून 2017 को स्पेशल कोर्ट ने सजा सुनाई थी। सुनवाई में आए तथ्य से पता चला था कि इस मामले के गवाह आरएल जाटव द्वारा जारी प्रमाण पत्रों के आधार पर ही सहकारी समितियों को काम किए बिना अनुदान का भुगतान किया जा रहा था।