अपने ही पैसे के लिए मारामारी, कैसे होगी बेटियों की शादी
हैदरनगर | प्रखंड मुख्यालय में एसबीआई के अलावे वनांचल ग्रामीण बैंक की शाखा है, जिसमें 90000 से अधिक खाताधारक हैं। ये बैंक नोटबंदी के बाद से अब तक उबर नहीं पाए हैं। ग्राहकों को अपने जमा पैसा ससमय निकालने में दांत खट्टे करने पड़ रहे हैं। सुबह होते ही इस शाखा में ग्राहकों की भीड़ देखते बनती है। प्रवेश के लिए लोहे की चैनल से अंदर घुसने के लिए सिर फुटौव्वल आम हो गई है। ग्राहक संतोष उपाध्याय, सत्येन्द्र राम, रामप्रवेश प्रजापति, बाबूलाल पासवान, संतोष सिंह सहित कई अन्य ने बताया कि मोदी राज में जीएसटी का लफड़ा होने से बैंकों में अपने खातों नगद जमा का प्रतिशत काफी घटा जबकि निकासी धारकों की संख्या अधिक है। दूसरी ओर यहां से जरूरतमंदों को नगद राशि नहीं मिलने से बाजार में भी सन्नाटा देखा जा रहा है। नोटबंदी व बाजार मंदी की मार व्यवसायी भी झेल रहे हैं। बीडीओ शैलेंद्र कुमार रजक द्वारा इस संबंध में बीएम सहित बैंक के उच्चाधिकारियों से बात किये जाने पर राशि उपलब्ध नहीं होना कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि इससे पीएम आवास योजना, शौचालय निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है। वहीं पैसे के अभाव में एटीएम के ताले भी हफ्तों से लटके पड़े हैं। नतीजन बुधवार को घंटों लाइन में प्रति ग्राहकों को निकासी के नाम पर 10000 हजार रुपए दिए गए। फिर तो राशि ही खत्म हो गई। दीगर बात तो यह है कि एक ओर पैसे की मार बैंकों के ग्राहक झेल रहे हैं, तो दूसरी ओर संकीर्ण स्थानों पर अवस्थित एसबीआई परिसर में पानी, शौचालय, पार्किंग को घोर अभाव रहने से शहर की बैंक रोड व जवाहर पथ पूरी तरह जाम हो जाते हैं। जिससे लोगों को पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।