प्रदेश भर के 92 स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर लग गया है। अपने इस दर्द को यह स्टूडेंट्स सीएम से लेकर तकनीकी शिक्षा बोर्ड तक के आला अधिकारियों के समक्ष समय रहते ही उठा तो चुके लेकिन कोई कार्रवाई न होने से अब यह यहां मिनी सचिवालय के बाहर रात-दिन धरना देकर अपने भविष्य की तलाश में मानिसक परेशानी झेलने को विवश हो गए हैं।
जहां काउंसिलिंग के बाद इन्हें हमीरपुर के निजी संस्थान में सीटें मिली थीं, वह बैंक से लेन-देन को लेकर बंद हो चुका है। बीते दिनों इन बच्चों ने पेपरों के लिए जो फॉर्म भरे वह भी रिजेक्ट हो चुके है, जबकि मात्र 18 दिन परीक्षाओं को शेष रह गए हैं। इनका कहना है कि हजारों की राशि खर्च करने पर भी उन्हें अंधकारमय होते भविष्य को तराशने के लिए परीक्षाओं की तैयारी करने को छोड़ कर अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को बैठना पड़ा है।
माइग्रेशन की मांग को भी नहीं किया पूरा : शुक्रवार को दिव्यांश, ज्योति राणा व प्रीति गुप्ता अनिश्चित कालीन क्रमिक अनशन के दूसरे दिन धरने पर बैठे। स्टूडेंट्स अश्वनी, बिमला, नेहा, प्रिया, सोनाली, नेहा रानी, ज्योति, सुषमा, नंदनी, काजल, प्रीति, रीना, आंचल, मधु, शुभम, मोहन, तेज सिंह, इशान, विनय, अंकित, जस्सी व पुनीत का कहना है कि काउंसिलिंग के बाद उन्हें देवस्य पॉलिटैक्निक संस्थान में सीटें मिली थीं।
हमीरपुर जिला के अलावा शिमला, मंडी, कांगड़ा, सोलन सहित दूसरे जिलों के भी 92 स्टूडेंट्स मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, फेशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई ट्रेड में शिक्षा ले रहे थे। लेकिन संस्थान पर ताले लगने से उन्होंने दूसरे संस्थानों में बोर्ड के अधिकारियों के समक्ष माइग्रेशन की मांग को उठाया, क्योंकि इस संस्थान में पढ़ाई नहीं हो पा रही है। इसके बावजूद भी माइग्रेशन नहीं की गई। उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री सहित बोर्ड और निदेशालय के निदेशक तक भी मिले, लेकिन कोई समाधान कोई नहीं हुआ। सरकार को उनके भविष्य को देखते हुए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।
मिनी सचिवालय के बाहर सड़क किनारे धरना देकर भविष्य की तलाश में स्टूडेंटस।
एसडीएम के मनाने पर भी नहीं माने
चूंकि यह सभी स्टूडेंट्स छात्राओं सहित मिनी सचिवालय के बाहर सड़क किनारे धरने पर बैठे हैं, ऐसे में वीरवार देर रात करीब 9:00 बजे एसडीएम अरिंदम चौधरी ने दौरा किया और स्टूडेंट्स से बात की, लेकिन मांग पर अडिग स्टूडेंट्स ने धरना समाप्त नहीं किया। शुक्रवार को भी यह जारी रहा, उनका कहना है कि जब तक उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कोई ठोस कदम सरकार नहीं उठाती, तब तक वह इसे समाप्त नहीं करेंगे।
सरकार ने नहीं उठाए कदम तो तेज होगा आंदोलन
वहीं इस स्टूडेंट्स के समर्थन में एएसएफआई और भारतीय नौजवान सभा भी सामने आ गई है। दोनों संगठनों ने चेताया है कि यदि इन स्टूडेंट्स की परीक्षाएं नहीं ली गईं और इनका भविष्य को संवारने को कड़़े कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को तेज कर दिया जाएगा। संगठन के प्रधान संतोष कुमार व सभा के अनिल मनकोटिया का कहना है कि इन बच्चों के साथ-साथ अधिकारियों और सीएम के समक्ष मांग उठाने पर भी इन्हें निराशा ही मिली है, ऐसे में यदि इन्हें परीक्षाओं से वंचित किया गया, तो आंदोलन को तेज कर दिया जाएगा। उनका कहना है जिस समय इन्हें पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए था, उस समय इन्हें भविष्य बचाने की जंग लड़नी पड़ रही है।