पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • पंचायत सहायकों को भी 3 साल में करें रेगुलर

पंचायत सहायकों को भी 3 साल में करें रेगुलर

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पंचायतों में लगे पंचायत सहायकों को रेगुलर करने में छह साल लगा दिए जा रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इनका पहले साल का सेवाकाल विभाग में बतौर कर्मचारी ही नहीं माना जा रहा है।

तीन साल बाद इनसे कागजी तौर पर बतौर अनुबंध कर्मचारी विभाग काम लेना शुरू कर रहा है। लेकिन विडंबना यह है कि इस तरह के प्रावधान में वे पंचायत सहायक भी पीस रहे हैं, जो कमीशन पास करके इस पोस्ट के लिए चयनित होकर आए हैं। उनको भी सरकार ने कोई राहत का इंतजाम नहीं किया है। जबकि सु्प्रीम कोर्ट एक फैसला ऐसा भी दे चुका है कि जो कमीशन टेस्ट के माध्यम से चयनित होने वालों को रेगुलर या फिर अनुबंध पॉलिसी के तहत नियुक्त किया जाए। लेकिन यहां तो विभाग स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से इन पदों के लिए करीब तीन साल पहले टेस्ट लेकर इन पदों को भरने की पहल की थी। लेकिन नियुक्ति पुराने प्रावधान के मुताबिक ही जिला परिषद कैडर में डाल कर उनसे भी विभाग काम ले रहा है।

आश्वासन मिला पर फाइल तैयार नहीं : पंचायत सहायक बीत दो साल से उनको तीन साल बाद सरकार और विभाग से पॉलिसी में संशोधन करके सीधा रेगुलर करने की मांग कर रहे, पिछली सरकार में मिला आश्वासन तो पूरा हो नहीं सका, लेकिन अब जो मौजूदा सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्री से आश्वासन मिला है। उस पर भी नई सरकार की इस बारे में कार्रवाई विभागीय स्तर पर फिलहाल जीरो दिख रही है। क्योंकि मंत्रिमंडल में जब तक इस संदर्भ में कोई हलचल नहीं होती, तब तक विभाग खामोश बैठा रहेगा।

हां मंत्री पंचायती राज वीरेंद्र कंवर इसकी मंजरी के लिए प्रपोजल फाइल विभाग से तैयार करवाना चाहें तो विभाग जरूर हरकत में आ सकता है। क्योंकि हाल ही में यह वर्ग हमीरपुर के बडू स्थित बहुतकनीकी कॉलेज में हुए एक कार्यक्रम में उनसे मिल कर अपनी मांग प्रखुमता से उठा चुके हैं। जिस पर उन्होंने शीघ्र इस बारे में फैसला लेने का आश्वासन दिया है।

कमीशन से चयनित पंचायत सहायकों को रेगुलर करने में लगाए जा रहे छह साल

दोहरी नीति के शिकार | पंचायत सचिव, अनुबंध सचिव पंचायत सहायक संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष माया देवी का कहना है कि पंचायत सहायक दोहरी अनुबंध पॉलिसी के शिकार हैं। पहले तीन साल पंचायत सहायक अगले तीन साल अनुबंध पंचायत सचिव के पदनाम से काम लिया जा रहा, वेतन भी 7 हजार से शुरू किया जाता है जो किसी भी विभाग के कर्मचारी या अनुबंध कर्मचारी के लिए तय नहीं। करीब 15 विभागों के काम और कार्यक्रम पंचायत में होते, हर काम हवाले कर दिया है। लेकिन रेगुलर करने के बाद भी विभाग में शामिल करने की बजाए जिला परिषद कैडर में रखा जा रहा है।

सरकार दे मंजूरी, तभी होगा

पंचायत सहायकों के लिए फिलहाल नई पॉलिसी की कोई फाइल तैयार नहीं की गई, लेकिन प्रस्तावित तो है। जिसके लिए जब तक सरकार कोई फैसला लेकर मंजूरी नहीं देती तब तक तीन साल बाद न रेगुलर किया जा सकता न ही विभाग में समायोजित किया जा सकता है। | राकेश कंवर, डायरेक्टर,, पंचायती राज विभाग, शिमला

खबरें और भी हैं...