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भ्रूण जांच मामले में डॉक्टर, महिला के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश नहीं

3 वर्ष पहले
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साढे तीन माह तक जांच में उलझा हुआ है मामला

प्रशासन और पुलिस ने किया था जल्द चालान पेश करने का दावा

सिटी रिपोर्टर। हमीरपुर

सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर घुमारवीं के एक निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर में भ्रूण लिंग जांच के मामले को पकड़ने के साढ़े तीन माह बाद भी अभी तक कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने चालान पेश नहीं किया है। पुलिस अभी जांच में ही उलझी हुई है, हालांकि प्रशासन और पुलिस ने दावा किया गया था कि इस मामले में जल्द से जल्द चालान कोर्ट में पेश कर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा। पुलिस ने मामले में अल्ट्रासाउंड सेंटर के मालिक और एक निजी अस्पताल में बतौर मिडवाइफ काम कर रही बिचौलिए महिला को पकड़ा था। हमीरपुर में पुलिस का यह अब तक का सबसे बड़ा भ्रूण लिंग जांच को लेकर ऑपरेशन था।

मामले की चल रही है अभी जांच : प्रशासन और पुलिस ने मिल कर ऑपरेशन नारी शक्ति के नाम से घुमारवीं में स्टिंग ऑपरेशन किया था, इसमें पुलिस के कई अधिकारी भी शामिल थे। जिन्होंने ग्राहक बन कर इस सारे ऑपरेशन को अंजाम दिया था। उक्त निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड का काम पिछले कई सालों से चल रहा था और पुलिस को इसे लेकर शिकायतें भी मिली थीं, जिसके बाद इशारे काम को अंजाम दिया गया था। जिस बिचौलिए महिला को पुलिस ने पकड़ा था वही महिलाओं को सेंटर तक ले जाकर लिंग जांच में मदद करती थी जिसकी एवज में लोगों से मोटे पैसे वसूले जाते थे। मामला की अभी जांच ही चला रही है, पुलिस इसकी वजह तकनीकी चीजों को इसमें शामिल करना बता रही है। जिसकी वजह से अभी तक कोर्ट में चालान पेश नहीं किया गया है।

पुलिस ने खरीदे थे हाईटेक डिवाइस

इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने करीब 50,000 के हाईटेक डिवाइस भी खरीदे थे, जिसमें बटन कैमरे और दूसरी हाईटेक चीजें शामिल थी। इन्हीं डिवाइस की मदद से पुलिस ने बाकायदा वीडियो और वॉइस रिकॉर्डिंग कर के ऑपरेशन पूरा किया था। पुलिस ने पीएनडीपी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर संबंधित लोगों को नोटिस दिया था। ज्वाइंट टीम ने ऑपरेशन को लेकर लगातार एक माह तक तैयारी की थी, पुलिस ने संबंधित लोगों की डिग्रियों की भी जांच की है। दूसरे जिले की ज्यूरिस्डिक्शन में जाकर ऑपरेशन को अंजाम देने का यह पहला मामला था।

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