गर्मियों में सूखने वाली पेयजल स्कीमों के स्रोतों में गहराने वाली समस्या का समाधान अब आईपीएच विभाग वहां मिनी टयूबवेल लगाकर निकालेगा। इसके लिए विभाग एक प्रस्तावित प्लानिंग पर सरकार के निर्देश पर काम रहा है। जिसे अब धीरे-धीरे अमलीजामा पहनाना भी शुरू कर दिया है। हमीरपुर उपमंडल में इस तरह के समाधान की शुरुअात हो चुकी है। हाल ही में विभाग ने दो उठाऊ पेयजल योजनाओं जठियाणा घिरथां और भारीं पलेहड़ा में मिनी टयूबवेल (बोरवैल हैंडपंप) लगा दिए हैं। जिनसे जरूरत पड़ने पर पानी लिफ्ट होगा। हालांकि इस सिस्टम से पानी भले ही कम लिफ्ट हो लेकिन लोगों की आपातकालीन जरूरत जरूर पूरी होगी। वहीं लोगों को भी पानी का मोल समझ आने लगेगा, जिससे वे इसे व्यर्थ गंवाने से भी परहेज करेंगे। आगामी समय में जिन जिन स्कीमों में सूखे की समस्या गंभीर होगी, उनमें इस समाधान को बजट मांगा जाएगा।
इस तरह का सिस्टम बरसात में भी मटमैले पानी की समस्या से राहत दिलाएगा, क्योंकि इससे पानी जमीन के नीचे से करीब 200 से 300 फिट से लिफ्ट होगा। जबकि बरसात में बारिशें होने पर नदी- नालों में मटमैला पानी कई बार ज्यादा हो जाता और गैलरी में भी चला जाता।
उसे विभाग जहां फिल्टर सिस्टम सहित ब्लीचिंग पाउडर और फिटकरी से इसे शुद्ध करने का प्रयास करता है। लेकिन लोगों में फिर भी परेशानी बनी रहती है। बरसात के मौसम में मटमैला कई तरह की बीमारियों को भी न्यौता देता है। स्त्रोत में ऐसी समस्या आने पर मिनी टयूबवेल से पानी सप्लाई किया जा सकेगा। वहीं गैलरी में लीकेज समस्या आने पर भी खुले से पानी लिफ्ट करने की जरूरत नहीं रहेगी।
जहां फिल्टर सिस्टम न लगा हो वहां लोग खुले से पानी उठाने का विरोध करते है। उनका विरोध भी खत्म होगा।
विधायक प्राथमिकता में डालंेगे
काबिलेगौर है कि विभाग का काम समस्या समाधान को प्लानिंग करना है। लेकिन प्लानिंग को बजट विधायक प्राथमिकता के माध्यम से आएगा। लोग स्वयं अपने इलाके के विधायक से ऐसी समस्या वाली स्कीमों को स सिस्टम लैस करने के लिए मांग उठाकर विधायक प्राथमिकता में डलवाएंगे। बजट आते ही विभाग इसे लगा देगा। वैसे जब भी विधायक अधिकारियों से समस्या समाधान कैसे हो की बात पूछते तो यह प्रपोजल भी उनके सामने रखी जाएगी। लेकिन काम सरकार से बजट आने पर ही होगा।
बड़ा खर्चा नहीं : एसडीओ
हमीरपुर सब डिविजन के एसडीओ राकेश गर्ग का कहना है कि यहां इस वक्त 21 पीने के पानी की और 9 सिंचाई की योजनाएं चल रहीं, दो में इस बार जठियाणा घिरथां, भारीं पलेहड़ा और बाड़ी घराण में बीते साल बोरबैल हैंडपंप लग गए हैं। इस पर बहुत बड़ा खर्चा नहीं आता, 5 इंच डाय वाली पाइप वाले पर करीब डेढ़ लाख और 7 इंच वाले में करीब ढाई लाख का खर्च आता है। जहां जहां के लिए सरकार से बजट आएगा, उनमें इसे लगाएगा जाएगा। लेकिन यह यह सिस्टम कितने लंबे वक्त तक राहत देगा यह तो वक्त ही बताएगा, जहां भी लगे वे इमरजेंसी में उपभोक्ताओं को फिलहाल अच्छी सुविधा दे रहे हैं।