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जमा पैसा दिया नहीं, उल्टा जिन लोगों ने कर्जा लिया नहीं उनको भी नोटिस

3 वर्ष पहले
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करोड़ों के घपले में शामिल बल्यूट सहकारी सभा के लोग लगातार परेशान हैं। जिन्होंने कर्जा भी नहीं लिया उन्हें भी विभाग के नोटिस जारी हो चुके हैं। हालत यह है कि जमा पूंजी तो उनकी मिल नहीं रही और ऊपर से कर्जे को लेकर नोटिस जारी हो चुके हैं। यह सारे लोग सोमवार को यहां हमीरपुर में पहले तो एआर दफ्तर में पहुंचे जहां इन्हें बुलाया गया था। उसके बाद यह सारे स्थानीय पुलिस स्टेशन भी पहुंच गए, जहां पर इस सारे घोटाले की जड़ सभा के सचिव और कुछ अन्य लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ मामला भी दर्ज है, लेकिन बड़ी विडंबना यह है कि लोगों को न्याय कब मिलेगा? उनके सब्र का बांध अब टूटने लगा है।

बड़ी बात यह है कि यहां आर्बिटेशन के तहत विभागीय कोर्ट में आज करीब 20 केस लगाए गए थे, जिन्होंने कर्जा नहीं लिया। मगर डिफाल्टर बताया गया। उन्हें सस्ता न्याय इसी के माध्यम से दिलाने की कोशिश की एक पहल है और इसमें इंस्पेक्टर राजेश कौशल के नेतृत्व में यहां पर यह कार्रवाई अमल में लाई गई है। लेकिन लोगों की नाराजगी यह है कि पुलिस भी इस मामले में जांच को लंबा खींच रही है। न्याय कब मिलेगा, कोई पता नहीं।

लोगों को कब मिलेगा न्याय, अब टूटने लगा सब्र का बांध

बल्यूट सहकारी सभा के पीड़ित विभागीय नोटिस मिलने के बाद एआर कार्यालय में बयान दर्ज करवाते हुए।

सभा के पास रेखा के पति के 7 लाख हैं जमा, अब उल्टा उसके नाम 1.70 लाख का लोन दर्शाया गया | बल्यूट गांव से आए रेखा देवी के पति का 7 लाख सभा में जमा था, वह तो मिला नहीं, अब 1.70 लाख का लोन भी दर्शाया गया है। ऐसे में समस्या तो होनी ही है। क्योंकि लोन लिया नहीं, जबकि कश्मीरी देवी भी 83,000 के फर्जी लोन पर यहां पहुंची हुई है। उनकी बहू सुषमा का कहना था कि पच्चास हजार तो मिला नहीं और उल्टे कर्जा दिखा दिया गया है। तारा देवी बीपीएल से ताल्लुक रखती है। उनकी बहू कांता आई हुईं थीं, क्योंकि इसी विवाद को लेकर तारा देवी बीमार हो गई हैं और 80000 लोन उनके नाम भी दर्शा दिया गया है। जबकि गांव की ही रितु देवी भी इसी तरह के फर्जी लोन पर बुलाई गई हैं। तिलक राज का कहना था कि सात लाख का लोन उनकी माता ज्ञानी देवी के नाम बना दिया गया है। जबकि कर्जा लिया ही नहीं। उधर इस सभा के प्रशासक कुलदीप शर्मा का कहना है कि जिन लोगों के नाम रिकॉर्ड में कर्जा निकला है, वह फर्जी है, तब भी उन्हें विभागीय कोर्ट में पहुंचकर इस मामले में बयान दर्ज करवाने पड़ते हैं। इसीलिए यहां कार्यवाही अमल में लाई गई है।

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