राष्ट्रीय होली मेले सुजानपुर को हुए तीन माह का समय हो चुका है, लेकिन चौगान की हालत प्रॉपर नहीं सुधर पाने के कारण खेल प्रेमियों में निराशा है। इस मेले के आयोजन के समय करीब मेला कमेटी की ओर से डेढ़ करोड़ की राशि बाहर से आने वाले व्यापारियों हिड़ोलने व डोम वालों से जमीन मुहैया करवाने की एवज में राशि एकत्र की गई थी। मेले के समापन पर चौगान की सुंदरता कायम रखने व स्वच्छता को लेकर 3 लाख की राशि तो खर्च की गई, लेकिन इतने दिन बीत जाने पर भी यहां उस समय के गड्ढे नहीं भर पाने के कारण खास कर खिलाड़ियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां जो दुकानें सजाई गई थीं, तो यहां गड्ढे करके दुकानों को सजाया गया था, लेेकिन यह अभी तक भी वैसे ही होने के कारण वहां के लोगों को भी समतल मैदान में अखरने लगे हैं।
गर्मियों के इस मौसम में सुबह-शाम शहर के सैकड़ों परिवार सुबह और शाम को यहां आते हैं और बैठ कर थकान को मिटाते हैं, लेकिन इन गड्ढों के कारण यहां आधे भाग पर बैठना भी किसी परेशानी से कम नहीं है। यही नहीं आधे चौगान पर प्रदेश के एकमात्र सैनिक स्कूल के स्टूडेंट्स शाम को खेल अभ्यास करते हैं, तो दूसरे छोर पर स्थानीय खिलाड़ी अपनी गेम को चलाते हैं, लेकिन वहां खेलना आसान नहीं।
सुजानपुर के चौगान में होलियों के बाद प्रॉपर सफाई न होने से पड़े गड्ढे।
क्या कहते हैं लोग और खिलाड़ी | चौगान में आने वाले वाले आम लोगों के साथ खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशासन को इस चौगान की सुध लेनी चाहिए। वैसे ही यहां के एक छोर पर गंदगी का कब्जा होने से वहां बैठना मुश्किल हो जाता है अौर जो गड्ढे होली मेले के दौरान दुकानदारों ने किए थे, उन्हें अभी तक प्रॉपर नहीं भरा जा सका है। राेहित, अजय, कुलदीप, पवन, संतोष, अशोक, राजेश, प्रकाश व अशोक सहित कई लोगों का कहना है कि यह चौगान समतल था, लेकिन होली मेले में यहां गड्ढे पड़ते हैं, उन्हें प्रॉपर भरा जाए। एक तो वैसे ही यहां आवारा पशुओं की भरमार रहती है, उसका भी प्रशासन कोई उचित प्रबंध नहीं कर पाया है। उन्होंने डीसी से भी मांग की है कि 300 साल पुराने इस चौगान की हालत सुधारने के अधिकारियों को कड़े निर्देश दे।