तहसील मुख्यालय से 25 किमी दूर बसे कांकड़दा में आधारभूत सुविधाओं की कमी है।कांकड़दा से साल्याखेड़ी के बीच 12 साल में भी सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।
ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ग्रामीण रविशंकर राय, लखनलाल शर्मा ने बताया गांव पहले नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ था, लेकिन इंदिरा सागर बांध के डूब में आने के बाद इसे दूसरे स्थान पर विस्थापित किया। 2005 में विस्थापन के बाद से ही अब तक सड़क, बिजली समेत अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
कांकड़दा से साल्याखेड़ी के बीच 5 किमी के रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर हैं। इससे जननी एक्सप्रेस भी नहीं आ पा रही है। ग्रामीणों के बीमार होने पर उन्हें जिला अस्पताल तक लाने में बड़ी मशक्कत करना पड़ती है। ग्रामीण संजीव भुसारे, रामदयाल शर्मा ने बताया गांव की समस्याओं के बारे में जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। साल्याखेड़ी, कांकड़दा, जामुनवाली, भैसवाड़ा सहित अन्य गांवों की भी यही स्थिति है। इससे करीब 5 हजार आदिवासी प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राम पंचायत के पास नहीं है फंड :
सरपंच रेखा भुसारे ने बताया ग्राम पंचायत के पास सड़क बनाने के लिए फंड नहीं है। इसलिए हमने ग्राम सभा की बैठक में भी प्रस्ताव लेकर शासन को भेजा है। सड़क निर्माण होने से आवागमन में आसानी होगी। काकड़दा से हरदा करीब 40 किमी का रास्ता है, कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसे ले जाने में परेशानी होती है।