दूसरे को खुशी देने वाले कर्म करें: कंवर
मनुष्य जीवन मिलना सबसे बड़ी बात है। मगर उससे भी बड़ी बात है सतगुरु, सत्संग और सतनाम का मिलना। समय बीता जा रहा है, पूर्ण संत को खोज कर नाम की भीख मांगो। नाम की दात बिना हम एक-एक पल को व्यर्थ खो रहे हैं। आध्यात्मिक चेतना को प्रदीप्त करो। जो सो रहे हैं वो जाग जाओ,जो जागे हुए हैं वो चलना शुरू करो और जो चल रहे हैं वो भागना शुरू करो। समय रहते अपने इस इंसानी चोले को सार्थक कर लो।
यह आह्वान राधास्वामी परमसंत सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने भिवानी रोड पर स्थित राधास्वामी आश्रम में आयोजित वार्षिक सत्संग में साध संगत को किया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान एक कृषि प्रधान देश है। किसान को अन्नदाता भी कहा जाता है। यहां का किसान बड़ा मेहनती होने के साथ साथ धर्मपरायण भी है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का त्योहार भी किसान की खुशियों से जुड़ा है और यदि खुशी के अवसर पर भी हमें सत्संग मिल जाए तो सोने पर सुहागा हो जाता है। रूह की बेहतरी के लिए सत्संग अति आवश्यक है। आदि ग्रंथ और सभी महापुरुषों ने बार-बार ये बताया है कि जीव 84 लाख योनियों के कर्जे में फंसा हुआ है। ना जाने वो कब से और कितनी योनियों में उलझा फंसा है। ऐसे में इंसानी चोला मिला है तो हमें एक अवसर मिला कि हम जप तप संयम और धर्म कमाए और साध का संग करे। लेकिन हम इस चोले में भी नीच कर्म कमाते हैं। उन्होंने कहा कि बुरे काम क्या पता किससे हो जाएं, लेकिन अगर गलत काम हो जाए तो पश्चाताप करो।
कर्म ऐसे करो जिससे दूसरे को खुशी मिले। जब आप परमात्मा के आगे समर्पण कर देते है तो आपके निमित कुछ बचता भी नहीं है। समर्पण मन तन और धन से होना चाहिए। जिसकी प्रभु भक्ति में रुचि होती है उसमें दया प्रेम और परोपकार स्वतः आ जाते हैं। तुलसीदास भी कहते हैं कि रघुनाथ की भक्ति बिना तो इंसान ऐसा है जैसे किसी सुंदर नारी की नाक कटी हो।
राधा स्वामी आश्रम में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते सतगुरु कंवर साहेब महाराज।