शातिर लोग पहले फोन करके एटीएम कार्ड का पासवर्ड पूछ कर हेराफेरी करते थे। अब एक नए तरीके से धोखाधड़ी और ठगी शुरू हो गई है। डिजिटल इंडिया के युग में अब बैंक खाता या एटीएम कार्ड नहीं, बल्कि आपके आधार कार्ड व पैन कार्ड नंबर का भी दुरुपयोग हो सकता है। आधार कार्ड व पैन कार्ड के जरिए डिजिटल पेमेंट अकाउंट खोलने के मामले सामने आने लगे हैं।
वार्ड 7 के जालवाला मोहल्ला के रहने वाले बिजली निगम के रिटायर्ड कर्मचारी प्रकाश चंद्र से आधार कार्ड नंबर व पैन कार्ड नंबर के जरिए किसी ने पांच डिजिटल खाते खोल लिए। 74 वर्षीय प्रकाश चंद्र ने बताया कि सोमवार को दोपहर तीन बजे उनके मोबाइल नंबर पर एक फोन आया और फोन करने वाले ने अपना नाम आकाश कुमार बताया। युवक ने कहा कि वह एसबीआई की हैल्पलाइन दिल्ली से बोल रहा है। वैरीफिकेशन के लिए उसने उनका आधार कार्ड का नंबर व पैन कार्ड का नंबर पूछा।
उन्होंने उसे अपना आधार कार्ड व पैन कार्ड नंबर बता दिए। जिसके बाद उसने मुझसे दो-दो मिनट के अंतराल पर कई बार ओटीपी नंबर पूछे। उन्होंने उसे यह भी जानकारी दे दी।
दोहते ने देखा तो पता चला
प्रकाश चंद्र ने बताया कि अहमदाबाद में रहने वाले उनके दोहते ने सोमवार रात्रि में फोन करके पूछा कि इतने खाते किसलिए खोले हैं। इस पर उन्होंने कहा कि कोई खाते नहीं खोले। दोहते ने पुलिस में शिकायत देने के लिए कहा। अगले दिन उन्होंने पुलिस को शिकायत दी और बैंक में खाता भी सीज करवा दिया। ताकि कोई खाते से राशि न निकाल सके।
यहां खोले खाते
पेटीएम बैंक, ऑक्सीजन वैलेट, दो आइडिया पेमेंट बैंक, एक मोबिक्विक।
हमनाम होने का फायदा उठाकर 25 हजार का चैक कैश कराया
भास्कर न्यूज | हांसी
इंश्योरेंस कंपनी का चेक किसी अन्य व्यक्ति को देकर चेक कैश करवाने पर पुलिस ने पोस्टमैन व एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। नाम एक होने का फायदा उठा कर चैक को कैश कराया गया।
पुलिस को दी शिकायत में सुलेमान बाड़ा निवासी कृष्ण ने कहा कि उन्होंने एक जीवन बीमा पाॅलिसी रिलायंस लाईफ इंश्योरेंस कंपनी से ले रखी थी। यह एक मनी बैक प्लान था व जिसमें 25 हजार रुपये की राशि कंपनी द्वारा उन्हें पालिसी की अवधि पूरी होने पर देनी थी। निर्धारित अवधि आने पर उन्होंने कंपनी कार्यालय में पता किया तो कर्मचारियों ने बताया कि मनी बैक प्लान की रिपेमेंट 25 हजार रुपये बनती थी। उस राशि का एक चैक मार्च 2015 में एचडीएफसी बैंक से जारी किया था। कंपनी ने बताया कि स्पीड पोस्ट के जरिए चैक उनके पते पर भेज दिया था जो कैश भी हो चुका है। कंपनी का यह जवाब सुनकर वह हैरान हुए और कंपनी के अधिकारियों को बताया कि ऐसा कोई भी चैक उन्हें प्राप्त नहीं हुआ था। जिस पर कंपनी वालों ने अपने रिकार्ड से चैक की फोटो कॉपी निकालकर सबूत के तौर पर दे दी। उन्होंने इस बात को लेकर अपने क्षेत्र के पोस्टमैन किशोरी से संपर्क किया तो उसने बता दिया कि चैक सुलेमान के कृष्ण पुत्र रामप्रकाश को दिया था। पुलिस को पोस्टमैन किशोरी व कृष्ण पुत्र रामप्रकाश के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया।