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तीन साल में नाबालिग बच्चियों से रेप के 3897 केस, 17% में चालान नहीं

3 वर्ष पहले
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पूरे देश में जम्मू के कठुआ में 8 साल की बच्ची और उत्तरप्रदेश के उन्नाव में नाबालिग से गैंगरेप के मामले में गुस्सा है। इन मामलों में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं और उनको न्याय दिलाने की मांग तेज हो रही है। इन हालात के बीच भास्कर ने राजस्थान में बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों की पड़ताल की तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। पिछले 3 सालों में प्रदेश में नाबालिग बच्चियों के साथ 3897 रेप की वारदातें हुईं। हर साल ऐसे रेप के मामलों की संख्या करीब 1300 है और हर रोज प्रदेश में तीन नाबालिग बच्चियां रेप का शिकार हो रही हैं। रेप के उम्रवार उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब चालीस प्रतिशत बच्चियां 14 साल तक की उम्र में रेप के दंश को झेल रही हैं। इनमंे करीब चालीस प्रतिशत बच्चियां 14 साल तक की उम्र में रेप के दंश झेलती हैं। वहीं 1877 घटनाएं शारीरिक शोषण की दर्ज हुई हैं। एक अन्य आंकड़े के अनुसार प्रदेश में हर रोज 11 बच्चे किसी न किसी तरह से यौन हिंसा का शिकार बन रहे हैं।

बच्चियों के रेप के मामलों में एक हकीकत यह भी है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रहने पर 17-18 प्रतिशत मामलों में चालान पेश नहीं कर पाती। वहीं, जो चालान पेश हो रहे हैं उनमें भी 3 से 6 महीने का समय लग रहा है। ऐसे मामलों में पीड़ित और उसका परिवार असहनीय दर्द व पीड़ा सहते हैं।

राज्य में रेप के 40% मामलों में पीड़िताओं की उम्र 14 साल से भी कम, कठुआ-उन्नाव की घटनाओं के बाद भास्कर ने प्रदेश के हालात पर पड़ताल की तो सामने आया यह सच

न्याय पाने के लिए भटक रहे हैं आज तक कई परिवार

केस 1

बाड़मेर का चौहटन कस्बा। 10 जनवरी, 2017 को दो नाबालिग बहनों से गैंगरेप हुआ। राजीनामा व मुकदमा वापस लेने के दवाब में गांव वालों ने परिवार को गांव निकाला दे दिया। पीड़ित बच्चियों के पिता का आरोप है कि 7 बार जांच बदली गई। मेडिकल में रेप की पुष्टि हुई, लेकिन पुलिस ने एफआर ही लगा दी। उनकी पांचों बेटियां अभी जोधपुर के बालिका गृह में हैं और वह खुद चौहटन छोड़कर बाड़मेर में रह रहे हैं। मुआवजे के तौर पर जरूर 1 लाख रुपए मिले हैं।

केस 3

बहनों से गैंगरेप हुआ, बिना कार्रवाई लगा दी एफआर

कचरा बीनने वाली बच्ची के गुनहगार 3 साल बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर

जून 2015 को हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में एक 10 साल की कचरा बीनने वाली बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस कार्रवाई इतनी सुस्त है कि 3 साल बाद भी नामजद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया और ना ही पीड़िता को कोई मुआवजा दिया गया है।

2015 से 2017 तक प्रदेश में हुए बच्चों के साथ अपराध

साल रेप शारीरिक शोषण हत्या चालान एफआर कुल मामले

2015 1232 539 54 1559 265 1825

2016 1347 577 38 1685 260 1962

2017 1318 761 47 1708 299 2126

एनसीआरबी 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के साथ देश भर में 1,06,958 अपराध हुए। 2015 और 2016 में 13.6%की दर से बच्चों के प्रति अपराध बढ़े।

रेप की मानसिकता समाज में घटती नैतिकता को बताती है। दूसरी बात, अगर पीड़ितों को ठीक समय पर पुलिस जांच नहीं मिल रही तो इसकी पड़ताल की जाएगी। हम समय-समय पर आने वाले केसों से पता करते रहते हैं।

-अनीता भदेल,

मंत्री, महिला एवं बाल विकास

ये सच है कि बच्चों के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं। वहीं, पुलिस का रवैया थोड़ा लचर ही है। 17-18%मामलों में चालान नहीं पेश हो रहे। हालांकि पोक्सो एक्ट के बाद स्थिति थोड़ी सुधरी है, लेकिन चालान पेश करने में 3 से 6 महीने अब भी लग रहे हैं।

-विजय गोयल, समन्वयक, राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण साझा अभियान

पिछले चार महीनों से फरार अपहरण और रेप के आरोपी

इसी साल जनवरी की घटना है। चूरू के सरदारशहर में 17 साल की एक लड़की का अपहरण हुआ और फिर उसके साथ रेप हुआ। चार महीने बाद भी लड़की का कोई सुराग नहीं है और न ही इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई है।

केस रेप की धाराओं में, चालान मारपीट का

बीकानेर का किशनासर गांव। पिछले साल सितंबर में यहां एक दलित नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। पीड़ित पर समझौता करने का दबाव डाला गया और परिवार के साथ मारपीट की। पुलिस ने जनवरी में चालान पेश कर दिया, लेकिन धाराएं सिर्फ मारपीट की लगाई हैं। जबकि पीड़ित परिवार का कहना है कि बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ था।

राजस्थान दूसरा राज्य जहां 12 साल तक की बच्चियों से रेप पर फांसी का प्रावधान

बच्चियों के साथ बढ़ती यौन हिंसा और दुष्कर्म की घटनाओं को देखते हुए राजस्थान में सरकार ने इसी साल 9 मार्च कोे एक बिल पारित किया है। जिसमें 12 या इससे कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म पर फांसी की सजा का प्रावधान है। वहीं, कठोर सजा के मामले में कम से कम 14 साल की जेल होगी। मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है जो यह बिल लाया है। बिल फिलहाल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है।

केस 2

केस 4

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