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पीएचईडी ने बंद किए मोघे, 48 घंटे में रिपोर्ट आने पर होगा भंडारण

3 वर्ष पहले
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पंजाब क्षेत्र में ब्यास नदी में बहाया गया जहरीला पानी शनिवार देर रात तक लोहगढ़ हैड पर पहुंचने की संभावना है। खास बात यह है कि जलसंसाधन विभाग की ओर से पंजाब को अभी कोई औपचारिक विरोध दर्ज नहीं करवाया गया है लेकिन इसे लेकर पीएचईडी के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अगले दो दिन तक पेयजल भंडारण के लिए बनाए गए मोघे बंद रखे जाएंगे। लौहगढ़ हैड पर पहुंचते ही प्रदूषित पानी के सैंपल लेकर जांच की जाएगी। 48 घंटे बाद जांच रिपोर्ट मिलने पर ही पेयजल भंडारण को लेकर निर्णय किया जाएगा। हालांकि विभाग के पास सिर्फ कोलीफॉर्म बैक्टिरिया की जांच की सुविधा ही उपलब्ध है। पानी के साथ बहकर आने वाले जानलेवा केमिकल्स की जांच विभागीय लेबोरेट्री में संभव ही नहीं होगी।

इसलिए बिगड़े हालात

प्रदेश की नहरों में पंजाब से प्रदूषित पानी लगातार ही आता है लेकिन अभी एक शुगर मिल का बॉयलर फटने को मुख्य वजह बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक बटाला के पास एक शुगर मिल का बॉयलर फटने के बाद जहरीला शीरा ब्यास नदी में बहा दिया गया। यही पानी शुक्रवार को हरिके हैड तक पहुंच गया था और अब शनिवार देर रात तक लौहगढ़ पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह जहरीला पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक बताया जा रहा है।

पंजाब में ट्रीटमेंट प्लांट भी प्रदूषण नियंत्रण के मानकों के अनुरूप नहीं, राजस्थान में नहीं है पेयजल को साफ करने की व्यवस्था, पंजाब से प्रदूषित पानी आज पहुंचेगा लोहगढ़ हेड, सिंचाई विभाग मौन, सैंपल लेंगे

अभी भले ही ब्यास में जहरीला शीरा छोड़ने के कारण स्थिति बिगड़ी हो लेकिन सतलुज के प्रदूषित पानी की वजह से प्रदेश बड़ी आबादी हमेशा ही जहरीला पानी पीने को मजबूर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में खुद पंजाब की ओर से दो साल पहले पेश की गई स्टेट्स रिपोर्ट के मुताबिक सतलुज में गंदे पानी के दो मुख्य स्त्रोत चिट्टी बेईं व बुढा नाला है। चिट्टी बेईं जालंधर की ओर से सतलुज में मिलती है और इसमें काला संघिया, फगवाड़ा व गढ़ा ड्रेन का प्रदूषित पानी शामिल होता है। इसके अलावा सैकड़ों गांवों का सीवरेज का पानी इराक ड्रेन, चमकौर साहिब मियानी ड्रेन के माध्यम से बुढा नाला में डलता है। जालंधर व लुधियाना में हजारों कुटीर उद्योग भी हैं जिनका प्रदूषित पानी सीवरेज में डाला जाता है। इनमें से कई जगह ट्रीटमेंट प्लांट भी लगे हैं लेकिन उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते रहे हैं। यह मामला अभी भी नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है लेकिन लंबा खिंचता जा रहा है।

हमारी सरकार की संवेदनहीनता| एक दशक से उठता रहा मुद्दा, प्रदेश में नहीं है पानी साफ करने की सुविधा

सतलुज का प्रदूषित पानी हरिके से होता हुआ राजस्थान की नहरों में आता है। करीब एक दशक से प्रदूषित पानी का मामला उठता रहा है लेकिन सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा यह है कि पीएचईडी की लेबोरेट्री में पानी की पूरी जांच की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। पीएचईडी की लेबोरेट्री सिर्फ कोलीफॉर्म बैक्टिरिया की ही जांच कर सकती है। ऐसे हालात में पानी की शुद्धता की उम्मीद करना ही बेमानी है। पीएचईडी के वाटर फिल्टर टर्बिडिटी की समस्या का समाधान करने के लिए है। पानी में मिले केमिकल्स, पेस्टिसाइड्स व हेवी मेटल्स को अलग करने लायक कोई फिल्टर हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिलों में नहीं हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि पीने का पानी कॉलीफार्म के मानक पर भी खरा नहीं उतरता है और हर साल पानी के सैकड़ों सैंपल फेल होते हैं।

पंजाब के गंदे नालों का पानी आ रहा सतलुज में, यही प्रदूषण है गंदे पानी की मुख्य वजह

सावधान|पंजाब ने काला पानी छोड़ा हमारी नहरों में, इसे सीधा बिल्कुल न पिएं

शुगर मिल का बॉयलर फटने से जहरीला शीरा ब्यास नदी में बहा दिया गया था। शुक्रवार को यही पानी बहकर हरिके हैड वर्क्स तक पहुंच गया। इसके बाद पंजाब ने यही पानी राजस्थान कैनाल, सरहंंद फीडर और गंगनहर के लिए छोड़ दिया। शनिवार देर रात तक यह पानी हमारे यहां पहुंच जाएगा।

दैनिक भास्कर ने चेताया तो जागे अधिकारी

प्रदूषित पानी को लेकर शनिवार सुबह दैनिक भास्कर में छपी फोटोग्राफ्स देखकर ही विभागीय अधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी ली। इसके बाद जांच पूरी होने तक पानी का भंडारण नहीं करने का निर्णय लिया गया। इसके अलाव आमजन के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है। लोगों से कहा गया है कि सीधे नहर से लेकर पानी का उपयोग न करें। अगले दो-तीन दिन वाटर वर्क्स के पानी का ही उपयोग किया जाए।

पूरा इलाका कहलाता कैंसर का गढ़| कारणों पर कोई नहीं बोलता, कैंसर विशेषज्ञ हनुमानगढ़ में लगा रहे कैंप

हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिलों को पूरे राजस्थान में कैंसर का गढ़ भी कहा जाता है। हालत यह है कि प्रदेश ही नहीं देश के नामी-गिरामी कैंसर विशेषज्ञ हनुमानगढ़ में कैंप लगा रहे हैं। मुंबई के कैंसर विशेष डॉ. दिनेश पेंडारकर ने पिछले दिनों हनुमानगढ़ में कैंप लगाया था। शनिवार को भी जयपुर से आए कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. ललितमोहन शर्मा ने कैंप लगाया। डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रदूषित पानी भी कैंसर की वजह हो सकता है। साथ ही यह भी बोले कि इस संबंध में विस्तृत रिसर्च के बाद ही कुछ कहना संभव होगा और यह काम सरकार ही कर सकती है। स्वास्थ्य विभाग भी कैंसर अर्ली डिटेक्शन कैंप का आयोजन करता है लेकिन कैंसर के कारण के संबंध में कोई नहीं बोलता। तंबाकू को कैंसर की मुख्य वजह बताया जाता है लेकिन प्रदूषित पानी को लेकर कोई भी खुलकर नहीं बोलता है।

क्या है कारण| पंजाब में बटाला के पास शुगर मिल के तीन बॉयलर लीक हो गए। इससे लीक लाखों लीटर शीरा बहकर ब्यास नदी में आ गया। नतीजा, पानी का आॅक्सीजन लेवल घट गया है। पंजाब ने शुक्रवार को यही पानी हमारी नहरों में छोड़ दिया, जो शनिवार को पहुंचेगा।

हम पर असर| डॉक्टर मानते हैं, यह पानी सेहत के लिए जानलेवा है। इसे सीधे किसी भी कीमत पर न खुद पिएं और न ही पशुओं को पिलाएं। पंजाब से राजस्थान तक हजारों जलीय जीव इससे मर चुके हैं।

जिम्मेदारों के बोल

अभी पेयजल भंडारण रोकने के लिए मोघे बंद करवाने के निर्देश दिए हैं। लौहगढ़ हैड पर पानी पहुंचते ही सैंपल लेंगे। 48 घंटे बाद कोलीफाॅर्म संबंधी रिपोर्ट मिलेगी। इसके बाद ही भंडारण को लेकर निर्णय लिया जाएगा। कोलीफाॅर्म के अलावा अन्य जांच की सुविधा लैब में नहीं है। मेजरसिंह ढिल्लो, एक्सईएन, पीएचईडी

प्रदूषित पानी को लेकर पंजाब से लगातार बात की जा रही है। यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी विचाराधीन है। पंजाब से कोई चर्चा नहीं हुई है। यह मामला भी उनके अधिकारियों के सामने रखेंगे। लखपतराय, एसई, जलसंसाधन विभाग (रेगुलेशन)

एनजीटी में प्रदूषित पानी को लेकर लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। वर्तमान स्थिति के बारे में भी एनजीटी को लगातार अवगत करवाते रहते हैं। 12 जुलाई को केस की सुनवाई होगी। इस दिन अंतिम फैसला आ जाए। शबनम गोदारा, पूर्व उपजिला प्रमुख

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