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आंचलिक श्रावक सम्मेलन में उत्कृष्ट काम करने का संदेश मुनि हिमांशु बोले- तपस्या करने से पवित्र होती है आत्मा

3 वर्ष पहले
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श्रीजैन श्वेतांबर तेरापंथी आंचलिक समिति का 17वां आंचलिक श्रावक सम्मेलन उत्कर्ष-2018 रविवार को टाउन स्थित रॉयल पैराडाइज पैलेस में हुआ। इसमें अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान और नशामुक्ति के बारे में बताते हुए समाज को उत्कृष्ठ कार्य करने का संदेश दिया गया। खास बात रही कि कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी श्रावकों के मोबाइल स्विच ऑफ करा दिए गए। दो सत्रों में हुए कार्यक्रम की शुरुआत सुबह साढ़े नौ बजे हुई। संघीय सत्र में आयकर के प्रिसिंपल चीफ कमीश्नर केसी जैन, पूर्व मंत्री चौ. विनोद कुमार व महासभा के अध्यक्ष हंसराज बैताला अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं सामाजिक सत्र में जलसंसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप व सभापति राजकुमार हिसारिया अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि उत्कर्ष-2018 के अनुरूप श्रावक उत्कृष्ठ कार्य करें। समाज का उत्थान कर जीवन जीने की कला सिखाने के मुख्य उद्देश्य को सार्थक करने पर बल दिया। कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण के शिष्य मुनि हिमांशु कुमार ठाणा-4 ने प्रवचन देते हुए कहा कि कहा कि तपस्या करने वाला अपनी आत्मा को पवित्र बनाता है। भगवान महावीर के अनुसार तप वही कर सकता है, जिसमें शरीर बल के साथ-साथ धैर्य और मनोबल होता है। उन्होंने कहा भगवान महावीर के सूत्रों पर चलकर हम सभी महावीर बन सकते हैं। अहिंसा के आयामों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रयोग जन-जन के लिए कल्याणकारी है। अहिंसा से हम अपने जीवन, देश और विश्व की सभी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने संयम की चेतना को विकसित एवं जागृत करने का आह्वान उपस्थितजनों से किया।

हनुमानगढ़. जैन समाज के कार्यक्रम में प्रवचन देते मुनि एवं मौजूद समाज के लोग।

शिक्षा-खेलकूद की प्रतिभाओं, तपस्या करने वालों और 75 वर्ष से अधिक आयु के श्रावकों का सम्मान

तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी ने बताया कि सम्मेलन में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अबोहर व फाजिल्का आदि क्षेत्रों से जैन बंधु शामिल हुए। 45 स्थानों से एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने शिरकत की। कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र बैद ने बताया कि सम्मेलन में आठ दिन या उससे अधिक तपस्या करने पर 40 जनों, विभिन्न परीक्षाओं, खेलकूद गतिविधियों व प्रोफेशनल डिग्री प्राप्त करने पर 50 प्रतिभाओं, अंचल के 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 50 श्रावकों का सम्मान किया गया। इस दौरान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कराई गई। वहीं सम्मेलन में पहुंचे श्रावक-श्राविकाओं को कूपन दिए गए जिसकी लॉटरी निकाल विजेताओं का सम्मान किया गया। अंचल अध्यक्ष भोजराज जैन ने आचंलिक श्रावक सम्मेलन के बारे में विस्तार से बताते हुए आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी दी। सम्मेलन संयोजक राजेंद्र बैद ने सहयोग के लिए आभार जताया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी ने सभा गतिविधियों की जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. पारस जैन, कृष्ण जैन, मदन बांठिया, विजय बांठिया, आनंद जैन, देवेंद्र बांठिया, राजेश जैन, विमल कोटेचा आदि मौजूद थे।

हनुमानगढ़. कार्यक्रम में प्रस्तुति देती महिलाएं।

तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी ने बताया कि सम्मेलन में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अबोहर व फाजिल्का आदि क्षेत्रों से जैन बंधु शामिल हुए। 45 स्थानों से एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने शिरकत की। कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र बैद ने बताया कि सम्मेलन में आठ दिन या उससे अधिक तपस्या करने पर 40 जनों, विभिन्न परीक्षाओं, खेलकूद गतिविधियों व प्रोफेशनल डिग्री प्राप्त करने पर 50 प्रतिभाओं, अंचल के 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 50 श्रावकों का सम्मान किया गया। इस दौरान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कराई गई। वहीं सम्मेलन में पहुंचे श्रावक-श्राविकाओं को कूपन दिए गए जिसकी लॉटरी निकाल विजेताओं का सम्मान किया गया। अंचल अध्यक्ष भोजराज जैन ने आचंलिक श्रावक सम्मेलन के बारे में विस्तार से बताते हुए आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी दी। सम्मेलन संयोजक राजेंद्र बैद ने सहयोग के लिए आभार जताया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष सुरेंद्र कोठारी ने सभा गतिविधियों की जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. पारस जैन, कृष्ण जैन, मदन बांठिया, विजय बांठिया, आनंद जैन, देवेंद्र बांठिया, राजेश जैन, विमल कोटेचा आदि मौजूद थे।

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