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राठी व साहिवाल नस्ल का गोवंश बढ़ाएगा पशुपालन विभाग, रोज 14 लीटर दूध देने वाले पशु चुनेंगे
देशी गोवंश की नस्ल बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से चयनित गोवंश का निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में राठी और साहीवाल नस्ल बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसमें प्रतिदिन 14 लीटर से अधिक दूध देने वाली गोवंश का चयन किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक इससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति काफी हद तक सुधर जाएगी। वहीं गोवंश की नस्ल भी बढ़ाई जा सकेगी। इसको लेकर विभागीय टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे में पशुपालकों के यहां जाकर साहिवाल व राठी नस्ल के गोवंश की मिल्क रिकॉर्डिंग की जा रही है।
इसमें टीम की ओर से सुबह-शाम संबंधित गोवंश के दूध का वजन किया जाता है। 14 लीटर से अधिक दूध की मात्रा होने पर ऐसे गोवंश का प्रोजेक्ट के तहत कृत्रिम गर्भाधान के लिए चयन किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में इस प्रोजेक्ट के तहत दस जिलों का ही चयन हुआ है जिसमें हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिले भी शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक सरकार प्रदेश में देशी नस्ल की गायों का कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से देशी नस्ल बढ़ाने का कार्यक्रम चला रही है। जिस जिले में जिस नस्ल की गायें अधिक हैं, वहां उनका नस्ल सुधार किया जा रहा हैं। जिले में साहिवाल व राठी गाय अधिक पाई जाती हैं। इस कारण इन दोनों नस्ल का सुधार किया जाएगा। यह कार्यक्रम जिले में तीन साल तक चलेगा।
प्रोजेक्ट के लिए श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ समेत 10 जिलों का चयन, 30 हजार में खरीदेंगे बछड़ा
निशुल्क होगा कृत्रिम गर्भाधान- प्रोजेक्ट के तहत चयनित गोवंश का निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। चयनित पशुपालक को प्रति पशु एक हजार रुपए दिए जाएंगें।
बछड़ा होने पर 30 हजार रुपए में खरीदेगा विभाग-कृत्रिम गर्भाधान से गोवंश के बछड़ा होने पर पशुपालन विभाग वह बछड़ा खुद खरीद करेगा। छह माह का बछड़ा होने के बाद आवश्यक जांच के बाद विभाग की ओर से प्रति बछड़ा 30 हजार रुपए में खरीद किया जाएगा।
हनुमानगढ़ साहीवाल नस्ल की गाय के दूध की रिकॉर्डिंग करते पशुपालन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी
संयुक्त निदेशक बोले- पशुपालकों को होगा फायदा: पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. युगभूषण वधवा ने बताया कि साहीवाल व राठी नस्ल बढ़ाने के प्रोजेक्ट के तहत अब जिले में करीब 200 गोवंश का चयन किया जा चुका है। इस योजना से पशुपालकों का काफी फायदा होगा। प्रतिदिन 14 लीटर से अधिक दूध देने वाले गोवंश के पशुपालक विभाग या नजदीकी पशु स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क कर सकते हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है देशी गोवंश का दूध
पशु चिकित्सक डॉ. रामकुमार फोगावट के मुताबिक देशी गाय का रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। यह दूध स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। विदेशी गाय के दूध की तुलना में देशी गाय के दूध में फैट प्रतिशत भी ज्यादा होता है।
प्रोजेक्ट के तहत जिले में इन तहसील क्षेत्रों का चयन: पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले में हनुमानगढ़, पीलीबंगा, टिब्बी और संगरिया तहसील क्षेत्र का चयन किया गया है। इनमें साहीवाल व राठी नस्ल के गोवंश को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।