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कम ब्याज पर समूह लोन का झांसा देकर ठगी, फाइल चार्ज के नाम लाखों रुपए वसूल चिटफंड कंपनी फरार / कम ब्याज पर समूह लोन का झांसा देकर ठगी, फाइल चार्ज के नाम लाखों रुपए वसूल चिटफंड कंपनी फरार

Hanumangarh News - शहर में एक चिटफंड कंपनी से जुड़े लोग लोन देने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी कर फरार हो गए। महिलाओं को सस्ते और कम ब्याज...

Bhaskar News Network

May 15, 2018, 04:05 AM IST
कम ब्याज पर समूह लोन का झांसा देकर ठगी, फाइल चार्ज के नाम लाखों रुपए वसूल चिटफंड कंपनी फरार
शहर में एक चिटफंड कंपनी से जुड़े लोग लोन देने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी कर फरार हो गए। महिलाओं को सस्ते और कम ब्याज पर समूह लोन देने का झांसा देकर फाइल चार्ज वसूलकर ठगी की गई। पीड़ित लोगों ने सोमवार को जंक्शन थाना पहुंचकर रोष प्रदर्शन कर कानूनी कार्रवाई की। इसके बाद जलसंसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप के आवास पर पहुंचकर घटनाक्रम से अवगत कराते हुए कार्रवाई की मांग की। इससे पहले कंपनी कार्यालय पहुंचे तो वहां पर ताला मिला। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हैरानी की बात है कि आवेदकों को आवेदन के 15-20 दिन बाद लोन स्वीकृत होने का कहा जाता। तय अवधि के बाद भी लोन की राशि बैंक खाते में नहीं आने पर आवेदक वहां पहुंचते तो कभी दस्तावेजों में कमी तो कभी सर्वर डाउन की बात कहकर टालते रहे। इस बीच सोमवार सुबह कई आवेदक कंपनी कार्यालय पहुंचे तो वहां पर ताले लटके हुए थे। कंपनी कर्मचारियों को कई बार कॉल करने के बाद भी संबंधित ने कॉल अटेंड नहीं की। वहीं कुछ के नंबर ही बंद मिले। इस पर ठगी होने की आशंका जताते हुए आवेदक जंक्शन थाना पहुंचे और कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर परिवाद सौंपा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

इस तरह हुई लोगों से ठगी: पुलिस थाना पहुंचे आवेदकों ने बताया कि कंपनी कर्मचारियों के कहने पर पांच-पांच जनों के समूह बनाए गए। कंपनी की ओर से 30 हजार रुपए के लोन आवेदन पर एक हजार रुपए फाइल चार्ज, 50 हजार रुपए के लोन पर 15 सौ रुपए फाइल चार्ज जबकि एक लाख रुपए का लोन आवेदन पर दो हजार रुपए फाइल चार्ज वसूला गया। इस तरह से सैकडों लोगों को झांसे में लेकर फाइल चार्ज सहित अन्य खर्चों के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ लिए गए। इसमें किसी ग्रुप ने दस हजार तो किसी ने 20 हजार रुपए जमा कराए। जंक्शन सीआई राजेश सियाग ने बताया कि इस संबंध में परिवाद मिला है। मामले की जांच की जा रही है।

दो हजार से ज्यादा फार्म लेकर 20 लाख की ठगी, कर्मियों और बिल्डिंग मालिक को भी लगाया चूना

जंक्शन बस स्टैंड के सामने बैंक शाखा के प्रथम तल पर गत 14 अप्रैल को एक फाइनेंस कंपनी ने अपना कार्यालय खोला था। इसके बाद कर्मचारियों और एजेंटों की आवश्यकता जताते हुए विज्ञापन प्रकाशित कराया। इस पर करीब 35-40 बेरोजगार युवा कंपनी के कार्यालय पहुंच गए जिसमें से किसी को मैनेजर तो किसी को फील्ड ऑफिसर और अन्य को एजेंट नियुक्त कर लोन के लिए आवेदन लाने के टारगेट दिए गए। कंपनी कर्मचारियों ने लोगों को सस्ते लोन का लालच देकर जाल में फंसाना शुरू कर दिया। जितना लोन उस हिसाब से फाइल चार्ज बताकर आवेदन लेते रहे। आवेदन कार्यालय में पहुंचने के बाद संबंधित आवेदक को कॉल कर बुलाया जाता और फाइल चार्ज वसूल कर रसीद दे दी जाती। कंपनी की ओर से शहर में लोन का झांसा देकर करीब दो हजार फार्म लिए गए। सूत्रों का कहना है कि ऐसे में लोगों से फाइल चार्ज के नाम पर ही करीब 20 लाख रुपए ठग लिए गए। 15 से 20 दिन के भीतर लोगों को लोन देने के दावे किए गए लेकिन लोन देने की बारी आई तो कंपनी के लोग ताला जड़कर फरार हो गए। आवेदकों के साथ ही जिस बिल्डिंग में कार्यालय खोला गया उसके मालिक और कर्मचारी एजेंटों को भी चूना लगाया गया। बिल्डिंग मालिक को 53 हजार रुपए महीना किराया का झांसा देकर अन्य सुविधाएं ले ली गईं लेकिन किराया दिए बिना ही आरोपी फरार हो गए। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग मालिक को एसी, कंप्यूटर सहित ऑफिस मेंटेन कर देने के लिए अलग से डेढ़ लाख रुपए देने का झांसा दिया गया। वहीं जिन बेरोजगारों को आवेदन लाने के लिए रखा गया था उनको भी वेतन नहीं दिया गया। बेरोजगार युवाओं को 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी का झांसा दिया गया।

कंपनी एजेंटों से भी बीमा के नाम पर पांच-पांच सौ रुपए की ठगी, टीम लीडरों ने ही कराया केस दर्ज

कंपनी में टीम लीडर के तौर पर नियुक्त किए गए कुलवंत सिंह पुत्र सोहनसिंह जटसिख निवासी वार्ड 14 ढिल्लो कॉलोनी, हरगोविंद पुत्र सोहन सिंह कुम्हार सिख निवासी वार्ड तीन मक्कासर, ललित कुमार पुत्र कृष्णचंद्र चमार निवासी वार्ड 38 सेक्टर नौ जंक्शन की सूचना पर पुलिस ने इस संबंध में कंपनी संचालक सहित पांच जनों के खिलाफ केस दर्ज किया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि एचएसबीएसओ रिसॉर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का अखबार में विज्ञापन देखकर साक्षात्कार दिया। इसके बाद उन तीनों के अलावा सोमवती, सिमरनजीत व सिमरन बेदी को टीम लीडर के तौर पर रखा गया और शेष 30-35 युवक-युवतियों को फील्ड वर्क के लिए दस से 12 हजार रुपए में रखा गया। कंपनी का रजिस्ट्रेशन देखने पर रजिस्टर्ड कंपनी का हैड संजय चौधरी निवासी अर्जुन नगर हापुर गाजियाबाद होना पाया। आरोप है कि कंपनी के मैनेजर कुलदीप सिंह पुत्र रामचंद्र निवासी भिवानी, सहायक मैनेजर अर्जुन, टीम लीडर सीनियर हैड राजीव व लेखाकार योगराज ने आवेदकों को लोन के लिए ऑफिस में बुलाकर एक-एक हजार रुपए प्रति व्यक्ति से ठग लिए। कंपनी में नियुक्त किए गए एजेंटों व अन्य कर्मचारियों से भी बीमा के नाम पर पांच-पांच सौ रुपए ठग लिए गए। 11 प्रतिशत ब्याज की दर से समूह लोन का झांसा देकर करीब दो हजार आवेदन लेकर फाइल चार्ज की ठगी की गई।

चिटफंड कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस अधिकारी से वार्ता करते लोग।

जंक्शन बस स्टैंड के सामने बैंक शाखा के प्रथम तल पर गत 14 अप्रैल को एक फाइनेंस कंपनी ने अपना कार्यालय खोला था। इसके बाद कर्मचारियों और एजेंटों की आवश्यकता जताते हुए विज्ञापन प्रकाशित कराया। इस पर करीब 35-40 बेरोजगार युवा कंपनी के कार्यालय पहुंच गए जिसमें से किसी को मैनेजर तो किसी को फील्ड ऑफिसर और अन्य को एजेंट नियुक्त कर लोन के लिए आवेदन लाने के टारगेट दिए गए। कंपनी कर्मचारियों ने लोगों को सस्ते लोन का लालच देकर जाल में फंसाना शुरू कर दिया। जितना लोन उस हिसाब से फाइल चार्ज बताकर आवेदन लेते रहे। आवेदन कार्यालय में पहुंचने के बाद संबंधित आवेदक को कॉल कर बुलाया जाता और फाइल चार्ज वसूल कर रसीद दे दी जाती। कंपनी की ओर से शहर में लोन का झांसा देकर करीब दो हजार फार्म लिए गए। सूत्रों का कहना है कि ऐसे में लोगों से फाइल चार्ज के नाम पर ही करीब 20 लाख रुपए ठग लिए गए। 15 से 20 दिन के भीतर लोगों को लोन देने के दावे किए गए लेकिन लोन देने की बारी आई तो कंपनी के लोग ताला जड़कर फरार हो गए। आवेदकों के साथ ही जिस बिल्डिंग में कार्यालय खोला गया उसके मालिक और कर्मचारी एजेंटों को भी चूना लगाया गया। बिल्डिंग मालिक को 53 हजार रुपए महीना किराया का झांसा देकर अन्य सुविधाएं ले ली गईं लेकिन किराया दिए बिना ही आरोपी फरार हो गए। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग मालिक को एसी, कंप्यूटर सहित ऑफिस मेंटेन कर देने के लिए अलग से डेढ़ लाख रुपए देने का झांसा दिया गया। वहीं जिन बेरोजगारों को आवेदन लाने के लिए रखा गया था उनको भी वेतन नहीं दिया गया। बेरोजगार युवाओं को 15 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह सैलरी का झांसा दिया गया।

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