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रावतसर में 16 साल पु

3 वर्ष पहले
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लीलाधर को पता था कि प्रेम को पालिकाध्यक्ष पति ने मारा, राज न खुले इसलिए 16 साल पूर्व उसकी भी गर्दन तोड़ की थी हत्या, शव नहर में फेंका


रावतसर में 16 साल पुराने लीलाधर सोनी हत्या कांड का खुलासा रविवार को जयपुर में एसओजी ने किया है। यह खुलासा प्रेम कालीरावण हत्याकांड में रिमांड पर चल रहे पालिकाध्यक्ष पति हरवीर सहारण ने पूछताछ के दौरान किया है। एसओजी ने इस हत्याकांड में सहयोगी पोहड़का के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश गोदारा को गिरफ्तार किया है। आईजी एसओजी दिनेश एमएन ने बताया कि रिमांड पर चले रहे हरवीर सहारण ने बताया कि 30 अप्रैल 2002 को अपने साथियों के साथ मिलकर रावतसर में लीलाधर सोनी की भी हत्या की थी। हरवीर सहारण ने बताया कि मृतक लीलाधर सोनी के पिताजी बद्रीप्रसाद से उसने 36 बीघा जमीन ग्राम पोहड़का रावतसर में खरीदी थी। जिसके पेटे 50 हजार रुपए बकाया थे। बकाया रुपए लेने के लिए मृतक लीलाधर सोनी उसके पास आया था। इससे पहले वह बार-बार उसे फोन कर धमका रहा था कि मेरे बकाया पैसे दे दे, नही तो मैं सबको बताऊंगा कि तूने प्रेमकुमार कालीरावणा की हत्या की है, जिस बात के डर से हरवीर सहारण ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर लीलाधर सोनी का अपहरण करवा कर गर्दन मरोड़ कर हत्या कर दी और लाश को खेतावाली ढाणी के पास इंदिरागांधी नहर में डाल दिया था। उधर, एसओजी ने प्रेम कालीरावण हत्याकांड में तीसरे आरोपी रणजीत मेघवाल को भी गिरफ्तार किया है। एएसपी कर्ण शर्मा ने बताया कि आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं इस मामले में पहले ही हरवीर सहारण व भीम बेनीवाल पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं।

हरवीर

प्रेम की हत्या के आरोपी पालिकाध्यक्ष पति कैसे पकड़ में आए...पढ़िए एक परिवार और शहर के संघर्ष की कहानी

बेटे के कातिल का खुलासा नहीं; सदमे से चल बसी मां, भाई ने वंश नहीं बढ़ाने की कसम खाई, शहर हुआ एकजुट, 17 साल बाद पकड़े में आए आरोपी

मनोज पुरोहित. हनुमानगढ़|17 साल तक हत्या के आरोपियों को पकड़वाने का इंतजार कर रही मां सदमे से चल बसी तो मजूदरी करने वाला भाई आरोपियों के डर से खुद का घर छोड़ बिना किसे बताए शहर से दूर कहीं और अकेला रहने लगा। मृतक के भाई ने आरोपी नहीं पकड़े जाने तक वंश आगे नहीं बढ़ाने तक की कसम खा ली। परिवार के इस संघर्ष को देख पूरा शहर न केवल जागा बल्कि एकजुट हुआ। जनआंदोलन का रूप ले लिया। मामला मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तक पहुंचा।

जांच बदल कर एसओजी को दी गई और आखिर एक परिवार ही नहीं पूरे शहर को न्याय मिला। 17 साल बाद हत्या के आरोपी पकड़े गए। अब भाई ने तय किया है कि वह शादी करेगा और वंश आगे बढ़ाएगा। मामला है जिले के रावतसर शहर का। जहां सियासत का गुस्सा कत्ल का कारण बना। जब पार्षद चुनाव में प्रेम कालीरावण ने अपनी मां को हरवीर सहारण की मां के सामने चुनावों में प्रत्याशी बनाया तो उसने अपने चार सहयोगियों के साथ 9 नवबंर 2001 को उसकी गर्दन तोड़ कर उसे मौत के घाट उतार दिया। क्रूरता ऐसी थी कि शव पहले अपने खेत में दबाया फिर निकाले जाने के डर से कैरोसिन छिड़क कर शव को जलाया। हड्डियों और राख को नहर में डाल दिया।

रावतसर में पहला मामला, जब पूरा शहर परिजनों को न्याय दिलाने के वास्ते एकजुट हुआ, धरना-प्रदर्शन किया, कस्बा भी बंद रखा

2016 में मामला उस समय खुला जब लूट के एक आरोपी ने स्वीकारा। तब मामला फिर रीओपन हुआ। तब आरोपी के पिता ने जांच बदलवा दी। पोलिग्राफी टेस्ट हुआ, जिसके बाद फिर एफआर लगा दी गई। इसके बाद पूरे शहर ने रावतसर बचाओ संघर्ष समिति बनी। धरना-प्रदर्शन और विरोध हुआ। करीब पांच दिन तक आंदोलन के बाद आला अधिकारी धरने पर पहुंचे। फरवरी 2016 में विरोध हुआ, शहर बंद रहा। कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनियां दी गई। फरवरी 2018 में फिर मामला रीओपन हुआ। मामला मुख्यमंत्री और गृह मंत्री तक गया। जांच बदलवाने की मांग उठी। जांच एसओजी को दी गई। एसओजी ने तीन दिन में ही पालिकाध्यक्ष पति हरवीण सहारण और उसके साथियों को पकड़ लिया। शहर के रामजस बुरड़क, स्व. सुरेंद्र पचार, कृष्ण कांतीवाल, रामनिवास महला, मुस्तफा खान, राकेश शास्त्री आदि आंदोलन का हिस्सा रहे। उनका कहना है कि हत्या के मामलों सहित तनाशाही रवैये को लेकर शहर के लोगों के साथ आंदोलन किया था जो रंग लाया और आज आरोपी सलाखों के पीछे हैं। यह जनता की जीत है।

प्रेम कालीरावण

परिवार को न्याय दिलाने के लिए जब पूरा एकजुट हुआ शहर।

मृतक प्रेम कालीरावण के भाई राजाराम की जुबानी

मैं और मेरी मां भटकते रहे, हमें धमकियां मिलीं, पर हार नहीं मानी

मेरा भाई ने एलएलबी की थी। वह कोर्ट में काम करता था। दूसरों के काम आता हमेशा। चुनावों के कारण आरोपियों ने मेरे भाई को मार दिया। मैं और मेरी मां नुंरा देवी ने थानों के चक्कर काटे, कभी सरदारशहर तो कभी रायसिंहनगर गए। कभी एसपी से मिले तो कभी सीआई से। वर्ष 2001 में अपने बेटे की गुमशुदगी दर्ज करवाई। मेरी मां दो साल तक भटकती रही, पर हारी नहीं। 2003 में हत्या का मामला दर्ज हुआ। पालिकाध्यक्ष के पति सहित चार लोगों को आरोपी बनाया गया। प्रभावशाली लोगों के आगे हमने घुटने नहीं टेके बल्कि संघर्ष करते रहे। जांच-पड़ताल चली। धमकियां मिलती रही, मामले में तीन बार एफआर लगी, पुलिस अफसर बदलते रहे। जांच फुटबॉल बन गई। कुछ हासिल नहीं हुआ तो पुलिस ने 2004 में एफआर लगा दी। काफी प्रयास के बाद मामला फिर रीओपन हुआ। 2007 में फिर एफआर लग गई। हमें धमकियां मिली। मुझ पर झूठे केस बनाए गए। हमें डराया गया। लेकिन तब तक शहर जाग चुका था। रावतसर के लोगों ने आंदोलन की ठानी। अफसोस की मां को यह गम खा गया और 2015 में मां चल बसी।

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