सैय्यद बली हुसैन बल्लू शाहपीर का 58वां वार्षिक उर्स में देर रात तक चले सूफीयाना महाकव्वाली कार्यक्रम में कलाकारों ने तबले की बंदिश पर समा बांधे रखा और बाबा बल्लू शाह के दरबार को सजदा किया। कव्वाली कार्यक्रम नानक शाह के वंदना के साथ शुरू हुआ। उसके बाद रजाहीर चंडीगढ़ ने सूफीयाना कलाम नित खैर मंगा सोनया में तेरी दुआ ना मैं होर मंगदी, सांसों की माला पे सिमरू में तेरा नाम, नानक शाह तेरी रहमत पेश किया। उसके बाद जी खान मशहूर गायक ने तेरी रहमतो का दरिया सरेआम मिल रहा है व मां की ममता और उसका आदर सत्कार करने की सीख अपनी गायकी के माध्यम से दिया। मैं कमली यार दी कमली और ढोल की तान पर अलग-अलग अंदाज में कलाकारों ने सुरों के रंग बिखेरे। नशीन बाबा नानक शाह नेतला ने कहा कि यह बाबा बल्लूशाह पीर की मजार हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख और ईसाई की एकता का प्रतीक है। किसी में कोई धर्म का भेदभाव नहीं है। मंच संचालन अमित गोस्वामी ने किया।
सैय्यद बली हुसैन बल्लू शाह पीर के वार्षिक उर्स में हुए कव्वाली कार्यक्रम
देशभर से पहुंचते हैं जायरीन, मनोकामना होती है पूरी
पीर बाबा की दरगाह में सालाना दीवान सजाया, खुशहाली व अमन चैन की मन्नत मांगी
पीलीबंगा| ग्राम पंचायत बहलोलनगर में बाबा प्रेमदास की कुटिया के पास स्थित पीर बाबा की दरगाह में सालाना दीवान सजाया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने माथा टेका और इलाके की खुशहाली व अमन चैन की मन्नत मांगी। इस दौरान दरगाह को भव्य तरीके से सजाया गया। हरीश हैरी के अनुसार दीवान में संत चमकौर दास व अतुल नाथ ने रातभर बाबा का गुणगान किया। हरियाणा से पहुंची पार्टी ने सूफी अंदाज में जब कव्वाली पेश की तो बाहर से आए श्रद्धालु झूमने लगे। इसी दौरान हल्की बरसात शुरू हो गई। संगीत का प्रभाव ऐसा था कि लोग बरसात में भी झूम रहे थे। नी मैं जाणा जोगी दे नाल, बुल्ले नूं समझावण आईयां भैणा ते परजाइयां इस तरह की सूफी रंगत देखकर लोग नाचने लगे। मंच संयोजन नवयुवक संस्था के संयोजक पालाराम इंदलिया ने किया। दीवान से पूर्व श्रद्धालुओं में लंगर भी बरताया गया।